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दिव्यांग बच्चों की समय पर पहचान और उन्हें जरूरी पढ़ाई में मदद देने के लिए शुरू किए गए ‘प्रशस्त ऐप 2.0’ के इस्तेमाल में जिले की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिले के 297 सरकारी और निजी स्कूलों व कॉलेजों ने अब तक इस ऐप पर ऑनबोर्डिंग और स्क्रीनिंग की जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की है। बच्चों की शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए बनाया ऐप इस गंभीर लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने संबंधित सभी संस्थानों के प्राचार्यों और प्रधानाध्यापकों से दो दिनों के भीतर जवाब मांगा है। इसके साथ ही, सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों की ऑनबोर्डिंग पक्का करने का सख्त निर्देश भी जारी किया गया है। एनसीईआरटी (NCERT) ने प्रशस्त ऐप 2.0 को खास तौर पर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए बनाया है। तय समय में पूरी हो ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया – विभाग इस ऐप के जरिए बच्चों में 21 तरह की दिव्यांगता की समय पर पहचान की जाती है, ताकि उन्हें सीखने, देखने, सुनने, बोलने और व्यवहार से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान और मदद मिल सके। प्रशस्त ऐप पर शिक्षकों को अपने मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है। इसके बाद यू-डायस डेटाबेस से जुड़कर बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है। विभाग का कहना है कि स्क्रीनिंग में देरी होने से जरूरतमंद बच्चों को समय पर खास पढ़ाई और जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अब विभाग की सीधी नजर इस बात पर है कि तय समय में ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी की जाए, नहीं तो सख्त कार्रवाई होगी।
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दिव्यांग की स्क्रीनिंग में लापरवाही, 297 प्राचार्यों से सफाई मांगी:प्रशस्त ऐप 2.0 के इस्तेमाल में पिछड़ने पर 2 दिन में देना होगा स्पष्टीकरण
