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यूपी में बिजली की मांग ने संकट बढ़ा दिया है। कई पावर प्लांटों के बंद होने से लगातार कटौती करनी पड़ रही है। गुरुवार को 3375 मेगावाट बिजली की आपात कटौती करनी पड़ रही है। इसकी वजह से गांवों में सिर्फ 14 घंटे के लगभग ही बिजली मिल पा रही है। जबकि रोस्टर के हिसाब से गांवों को कम से कम 18 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। अगस्त में 31,296 मेगावाट मांग पूरी, सितंबर में क्यों नहीं बिजली संकट के लिए पूरी तरह से यूपी पावर कारपोर्रेशन की अकुशलता कारण बताया जा रहा है। यूपी में सितंबर 2023 में प्रदेश में अधिकतम 27,389 मेगावाट, सितंबर 2024 में 29,347 मेगावाट और सितंबर 2025 में 30,255 मेगावाट की अधिकतम मांग पूरी की गई थी। वहीं, अगस्त 2026 में बिजली की अधिकतम मांग 31,296 मेगावाट तक पहुंची थी। फिर सितंबर को लेकर तैयारी क्यों नहीं की गई थी। अमूमन बारिश नहीं होने पर सितंबर में उमस और गर्मी का दौर बढ़ता है। ऐसे में बिजली की मांग बढ़ जाती है। विभाग 1 से 16 सितंबर के बीच अधिकतम 27,407 मेगावाट ही बिजली की सप्लाई दे पाया। मतलब यूपी पावर कारपोरेशन ने सितंबर में बिजली सप्लाई के लिए कोई कार्ययोजना ही नहीं तैयार की थी। ऐसा ना होता तो बिजली का संकट इस तरह से सामने नहीं आता। अब कोयला संकट के चलते पावर प्लांटों के बंद किए जाने की बात कही जा रही है। जबकि हर साल बारिश में कोयला खदानों से निकासी और ढुलाई प्रभावित होती है। कोयले का इंतजाम पहले से करना चाहिए था। 13 से 17 सितंबर के बीच लगातार आपात कटौती उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली संकट को लेकर बिजली प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल उठाए। उन्होंने यूपीएसएलडीसी की दैनिक प्रणाली रिपोर्ट के आधार पर दावा किया कि 1 सितंबर से लगातार यूपी में मांग से कम बिजली की सप्लाई की जा रही है। यूपी में इस तरह हो रही कटौती– 18 घंटे का रोस्टर भी पूरा नहीं अवधेश वर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित 18 घंटे के रोस्टर के बावजूद उपभोक्ताओं को तय अवधि की बिजली नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि बिजली की उपलब्धता कम होने की स्थिति में कटौती का भार मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों पर डालना उचित नहीं है। इसी के साथ नगर पंचायत, तहसील और बुंदेलखंड क्षेत्र भी कटौती से प्रभावित हैं। सिर्फ शहरों को पर्याप्त बिजली दी जा रही है। यहां भी स्लम इलाकों में कई बार बिजली काटी जा रही है। परिषद ने कारपोरेशन से तत्काल अतिरिक्त बिजली खरीदने की मांग की है।
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यूपी के गांवों में 14.15 घंटे ही बिजली:17 सितंबर को 3,375 मेगावाट की आपात कटौती
