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मानसा प्रसिद्ध पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की सुनवाई कर रही मानसा कोर्ट में गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई की प्रोडक्शन वारंट याचिका पर अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) ने कड़ा एतराज जताया है। अनमोल बिश्नोई ने अदालत में अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई थी कि उसे मूसेवाला हत्याकांड में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाए और दिल्ली की तिहाड़ जेल से मानसा लाने के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाए, ताकि केस की सुनवाई में तेजी आ सके। बीती शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने इस याचिका को तथ्यहीन बताते हुए अदालत से इसे पूरी तरह खारिज करने की मांग की। आरोपी तय नहीं कर सकता जांच का तरीका और समय’
अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए अभियोजन पक्ष ने दो-टूक कहा कि अनमोल बिश्नोई की अर्जी में कोई कानूनी आधार या मेरिट नहीं है। अभियोजकों ने तर्क दिया कि कानून के मुताबिक किसी भी आरोपी को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह जांच एजेंसी को निर्देश दे कि उसे जांच के किस चरण में क्या कदम उठाना चाहिए। जांच की दिशा, पूछताछ का समय और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी तरह से जांच एजेंसी और कानून के अधिकार क्षेत्र में आती है, जिसे कोई गैंगस्टर या आरोपी अपनी मर्जी से तय नहीं कर सकता।
‘तिहाड़ से कस्टडी का फैसला कानून और साक्ष्यों के आधार पर
अभियोजन पक्ष ने अदालत को अवगत कराया कि अनमोल बिश्नोई इस समय किसी अन्य आपराधिक मामले में दिल्ली की तिहाड़ सेंट्रल जेल में बंद है। ऐसे में मूसेवाला मर्डर केस में उसकी गिरफ्तारी और प्रोडक्शन वारंट की मांग अनुचित है। अभियोजन ने स्पष्ट किया कि अनमोल की मानसा अदालत में पेशी या हिरासत में पूछताछ की जरूरत है या नहीं, इसका निर्णय केवल जांच एजेंसी एकत्र किए गए सबूतों और कानून के दायरे में करेगी। किसी अन्य मामले में न्यायिक हिरासत काट रहे बंदी को किसी दूसरे केस में पेश करने का एक निश्चित कानूनी प्रावधान है और यह पूरी तरह से सक्षम अदालत के आदेशों के अधीन है, नहीं की आरोपी की व्यक्तिगत मांग पर। विदेशी धरती से डिपोर्टेशन और कानूनी शिकंजा
हत्याकांड के बाद अनमोल बिश्नोई विदेश भाग गया था, जहां से वह लगातार गैंग की गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया था और बाद में सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से उसे डिपोर्ट कर भारत लाया गया। भारत लाए जाने के बाद से ही उस पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और विभिन्न राज्यों की पुलिस का कानूनी शिकंजा कसा हुआ है। अनमोल ने 27 फरवरी को मानसा कोर्ट में यह अर्जी लगाकर दावा किया था कि वह मामले के ट्रायल का सामना करना चाहता है, लेकिन अभियोजन ने इसे कानूनी प्रक्रिया में दखलंदाजी करार दिया है।
29 मई 2022 का खूनी घटनाक्रम और अनमोल का कनेक्शन
गौरतलब है कि 29 मई 2022 को मानसा जिले के जवाहरके गांव के पास सिद्धू मूसेवाला की गाड़ी को घेरकर अंधाधुंध गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड की जिम्मेदारी कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग और कनाडा में बैठे गोल्डी बराड़ ने ली थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई ने इस पूरी साजिश में अहम भूमिका निभाई थी। आरोप है कि उसने शूटरों को लॉजिस्टिक सहायता, फर्जी पासपोर्ट और हथियार मुहैया कराने में मदद की थी तथा वारदात से ठीक पहले फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत से फरार हो गया था।
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मूसेवाला केस-अनमोल की प्रोडक्शन वारंट अर्जी का विरोध:अभियोजन बोला-जांच एजेंसी को डिक्टेट नहीं कर सकता आरोपी; याचिका खारिज की उठाई मांग
