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चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह कभी पुलिस विभाग में सख्त पुलिस अधिकारी के तौर पर पहचाने जाते थे। उन्होंने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को पहली बार गिरफ्तार किया था। अब गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह उर्फ बाबा के खिलाफ चल रहे एक मामले में उनकी गवाही होनी है, लेकिन वह कोर्ट में पेश नहीं हो रहे हैं। अदालत की ओर से उन्हें कई बार समन भेजे जा चुके हैं और जमानती वारंट भी जारी किए जा चुके हैं। अब कोर्ट ने उन्हें 21 सितंबर को पेश होने के लिए फिर समन जारी किया है। यह मामला करीब 8 साल पुराना है। 2018 में सेक्टर-43 बस स्टैंड के पास पुलिस और गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसी मामले में पूर्व इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह की गवाही महत्वपूर्ण है। दिलप्रीत की गिरफ्तारी के दौरान मुठभेड़ पुलिस के अनुसार दिलप्रीत सिंह और रंजीत सिंह वर्ष 2014 के एक मामले में वांछित थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि दिलप्रीत सिंह सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार में सेक्टर-43 बस स्टैंड पहुंचने वाला है। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उसे पकड़ने के लिए पुलिस की कई टीमें बनाई गईं। पुलिस टीमों को अलग-अलग जगह तैनात किया गया था, ताकि दिलप्रीत को मौके पर ही गिरफ्तार किया जा सके। दोपहर के समय टीम को सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार आती दिखाई दी। इंस्पेक्टर गुरचरण सिंह की टीम ने कार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कार चालक ने वाहन नहीं रोका। इसके बाद इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह ने अपनी फॉर्च्यूनर कार से स्विफ्ट डिजायर का पीछा किया। पुलिस के अनुसार पीछा करते हुए अमनजोत सिंह ने अपनी कार से स्विफ्ट डिजायर को पीछे से टक्कर मारकर रोकने की कोशिश की। कार से हथियार लेकर निकला दिलप्रीत पुलिस के अनुसार कार को रोकने के दौरान दूसरी पुलिस टीम ने उसकी विंडस्क्रीन पर पत्थर फेंके। इसके बाद दिलप्रीत सिंह हथियार लेकर कार से बाहर आया। दिलप्रीत ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार उसने इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह और इंस्पेक्टर शिव कुमार की ओर गोली चलाई। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। डीएसपी राकेश यादव ने गोली चलाई, जो दिलप्रीत के पैर में लगी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। अब इसी मुठभेड़ मामले में गवाही सेक्टर-43 बस स्टैंड के पास हुई इस मुठभेड़ के मामले में अब अदालत में सुनवाई चल रही है। घटना के समय पुलिस टीम का हिस्सा रहे अमनजोत सिंह इस मामले में गवाह हैं। इसलिए अदालत में उनकी गवाही होनी है। हालांकि, कई बार समन जारी होने के बावजूद वह कोर्ट में पेश नहीं हुए। अदालत की ओर से जमानती वारंट भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद उनकी गवाही अभी पूरी नहीं हो पाई है। अदालत ने अब पूर्व इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह को 21 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के लिए दोबारा समन जारी किया है। इस मामले में उनकी गवाही होने के बाद ही मुठभेड़ से जुड़े घटनाक्रम पर कोर्ट के सामने उनका पक्ष दर्ज होगा। अमनजोत सिंह के लगातार पेश नहीं होने की वजह क्या है, इसकी जानकारी इस मामले में उपलब्ध नहीं है। अदालत के रिकॉर्ड में फिलहाल इतना है कि उन्हें कई बार बुलाया जा चुका है और अब दोबारा पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। लॉरेंस बिश्नोई को भी गिरफ्तार किया अमनजोत सिंह चंडीगढ़ पुलिस में रहते हुए कई चर्चित मामलों की जांच और कार्रवाई से जुड़े रहे हैं। वह उस पुलिस टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने लॉरेंस बिश्नोई को पहली बार गिरफ्तार किया था। इसी वजह से पुलिस विभाग में उनका नाम चर्चित रहा है। अब दिलप्रीत सिंह के खिलाफ चल रहे पुराने मुठभेड़ मामले में उनकी गवाही पर अदालत की नजर है। 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि वह अदालत में पेश होते हैं या नहीं।
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गैंगस्टर दिलप्रीत केस-चंडीगढ़ के पूर्व इंस्पेक्टर की गवाही अटकी:लॉरेंस बिश्नोई को पहली बार अमनजोत ने पकड़ा; 21 सितंबर को फिर पेश होने के आदेश
