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पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र और किसान नेता नेमसिंह के बीच-बहस:बोले- पंचायत बुलाकर बात होनी चाहिए, किसने-किसके लिए क्या किया




भरतपुर की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने किसान नेता नेम सिंह फौजदार के बयान पर वीडियो जारी कर जवाब दिया है। विश्वेंद्र सिंह ने अपने वीडियो संदेश में पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए। साथ ही नेम सिंह को आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की चुनौती दी और कहा कि पंचायत बुलाकर सामने बैठकर यह बात होनी चाहिए कि उन्होंने नेम सिंह के लिए क्या किया और नेम सिंह ने उनके लिए क्या किया। नेम सिंह की माताजी के निधन की जानकारी वीडियो से मिलने का दावा पूर्व राजपरिवार के सदस्य और कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें किसी ने एक वीडियो भेजा था। सुबह किसान नेता नेम सिंह के गांव में खेल-कूद प्रतियोगिता का कार्यक्रम था। इसी दौरान उन्हें पहली बार जानकारी हुई कि नेम सिंह की माताजी का निधन हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि निधन की सूचना उन्हें पहले दी गई होती तो वे निश्चित रूप से उनके घर जाकर संवेदना व्यक्त करते। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद जिन लोगों के घरों में दुख हुआ, वहां भी वे संवेदना व्यक्त करने जाते रहे हैं। विश्वेंद्र सिंह ने दावा किया कि उनके खिलाफ चुनाव में बूथ कैप्चरिंग तक करने वाले लोगों के घर भी यदि कोई संवेदना का अवसर आया तो उन्होंने वहां जाकर अपनी संवेदना व्यक्त की। ‘झोपड़ी’ वाली टिप्पणी पर भी दिया जवाब विश्वेंद्र सिंह ने झोपड़ी में रहने वाली टिप्पणी का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सामने वाला बार-बार उन्हें झोपड़ी का जिक्र कर रहा है। उन्होंने कहा, तीसरी मंजिल से गिरने वाले को चोट लगती है। सामने वाला खुद तीन मंजिला मकान में रहता है। अगर वह तीन मंजिला मकान से गिरेगा तो उसे कितनी चोट लगेगी। आरक्षण के मुद्दे पर बोले- 1990 में लोकसभा से दिया था इस्तीफा आरक्षण के मुद्दे पर विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि 1990 में उन्होंने इसी मुद्दे पर लोकसभा से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने ही नेम सिंह को नेता बनाया और झंडा सौंपा था। उन्होंने कहा, “आप कौन होते हो मुझे झंडा सौंपने वाले, आपको मैंने झंडा सौंपा था।” उन्होंने कहा कि उस समय जितने भी मामले थे, उनमें से कई की जिम्मेदारी उन्होंने अपने ऊपर ली, क्योंकि वे उस समय विधायक थे। उन्होंने कहा कि विधायक से जुड़े मामलों की जानकारी नेम सिंह के साथ-साथ जनता को भी है और ये मामले सीआईडी तक जाते हैं। मोती महल में मुलाकात का जिक्र किया विश्वेंद्र सिंह ने पिछले चुनावों से जुड़े एक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि दो चुनाव पहले किसान नेता नेम सिंह मोती महल में महारानी के पास गए थे। उन्होंने दावा किया कि वहां नेम सिंह ने अपनी इज्जत बचाने और फोटो लगाने की बात कही थी। उन्होंने बरताई में रहने वाले एक बाबा का भी जिक्र किया। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि वे साधु-संतों का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि महारानी भरतपुर को करीब एक घंटे तक बाबा के पैरों में बैठना पड़ा और उन्हें आशीर्वाद तक नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कहा कि वहां क्या गतिविधियां चलती हैं, इसकी उन्हें जानकारी है। उन्होंने नेम सिंह से कहा कि उन्हें अपना मुंह खुलवाने के लिए मजबूर न करें। उन्होंने कहा कि उन्होंने नेम सिंह को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, “झंडा मैंने सौंपा, रेल मैंने रोकी।” सांसद संजना जाटव को लेकर भी साधा निशाना सांसद संजना जाटव के संबंध में विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि वे सांसद हैं और उन्हें सांसद बनवाने में उन्होंने भूमिका निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि नेम सिंह यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे सांसद के कितने नजदीक हैं। पंचायत बुलाने की चुनौती, खर्च उठाने की बात विश्वेंद्र सिंह ने सीधे तौर पर पंचायत बुलाने की चुनौती स्वीकार करते हुए कहा, “पंचायत बुलानी है, खूब बुलाओ।” उन्होंने कहा कि उन्हें पंचायत बुलाने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है, वे खुद पंचायत बुला सकते हैं और उसका पूरा खर्च भी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि पंचायत में आमने-सामने बैठकर यह बात होनी चाहिए कि ‘मैंने तुम्हारे लिए क्या किया और तुमने मेरे लिए क्या किया।’ पीठ पीछे बयान देने के बजाय सामने आने को कहा विश्वेंद्र सिंह ने नेम सिंह से पीठ पीछे बयान देने के बजाय सामने आने को कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें भी विश्वेंद्र सिंह कहते हैं और वे अच्छे-अच्छे मुख्यमंत्रियों से बहस कर चुके हैं और अभी भी करते हैं। उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि वे 65वें वर्ष में चल रहे हैं। विश्वेंद्र सिंह ने नेम सिंह पर बुजुर्गों का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें बुजुर्गों को सम्मान देना सीखना चाहिए। बोले- आगे बढ़ाने की कोशिश की विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने नेम सिंह को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन उनके अनुसार किसान नेता नेम सिंह को एक नेता से दूसरे नेता के पास जाने की आदत है, जहां उनका मतलब निकलता है।



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