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धार जिले में पिछले कुछ दिनों से बारिश थम गई है। तेज धूप के साथ गर्मी बढ़ने लगी है। किसान अब बारिश की उम्मीद छोड़कर रबी सीजन की फसलों को लेकर चिंता में हैं। किसानों का कहना है कि इस साल पिछले साल की तुलना में करीब आधी बारिश हुई है। उन्होंने प्रशासन से बारिश, फसल और जलस्रोतों की स्थिति का सर्वे कराकर धार जिले को सूखा घोषित करने की मांग की है। पिछले साल के मुकाबले 617 मिमी कम बारिश 24 सितंबर 2025 तक धार जिले में 1266.2 मिमी (करीब 49.85 इंच) बारिश दर्ज हुई थी। वहीं, 24 सितंबर 2026 तक इस साल जिले में सिर्फ 649.2 मिमी (करीब 25.56 इंच) बारिश हुई है। इस तरह पिछले साल की तुलना में इस बार 617 मिमी (करीब 24.29 इंच) कम बारिश हुई है। आंकड़ों के हिसाब से इस साल बारिश पिछले साल से करीब 48.7 प्रतिशत कम रही। सोयाबीन के बाद गेहूं-चना की चिंता किसान विष्णु मुकाती ने बताया कि इस बार बारिश पर्याप्त नहीं हुई। सोयाबीन की फसल जैसे-तैसे पकने की स्थिति में पहुंची है, लेकिन अब गेहूं और चने की फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर बारिश नहीं हुई तो रबी की फसल की बोवनी और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। कम बारिश के कारण किसानों के सामने सिंचाई की व्यवस्था करना भी चुनौती बन सकता है। जलस्रोतों में भी कम हुआ पानी किसानों के मुताबिक बारिश की कमी का असर खेती के साथ जलस्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है। जिले के कई जलस्रोतों में पानी का स्तर कम है। अगर अब बारिश नहीं हुई तो आने वाले महीनों में गांवों और शहरों में पीने के पानी की समस्या बढ़ने की आशंका है। विष्णु मुकाती ने कहा कि प्रशासन को बारिश की कमी को देखते हुए जिले में फसल और जलस्रोतों की स्थिति का सर्वे कराना चाहिए। इसके आधार पर किसानों को राहत देने और जिले को सूखा घोषित करने की दिशा में कार्रवाई की जानी चाहिए। किसानों ने सर्वे की मांग की किसानों का कहना है कि लगातार कम बारिश और बढ़ती गर्मी का असर खरीफ के साथ आने वाली रबी फसल पर भी पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को खेतों और जलस्रोतों की वास्तविक स्थिति का आकलन कराना चाहिए। किसानों ने मांग की है कि सर्वे के बाद स्थिति के अनुसार राहत और सूखा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
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धार में इस साल 48.7% कम बारिश:किसानों ने सूखा घोषित करने की मांग की, गेहूं-चना और पेयजल संकट की चिंता बढ़ी
