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जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ बदसलूकी और औरंगाबाद जिले के दुधमी क्षेत्र में नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के विरोध में भाकपा माले के महिला संगठन अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (एपवा) ने प्रतिवाद मार्च निकाला। मार्च में शामिल महिलाओं ने बिहार में बेटियों की सुरक्षा को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। महिलाओं ने “बिहार में बेटियां सुरक्षित क्यों नहीं, बिहार सरकार जवाब दो”, “बेटियों को सुरक्षा देने में नाकाम सरकार जवाब दो” और “बलात्कारियों को फांसी दो” जैसे नारे लगाए। मार्च का नेतृत्व एपवा की जिला अध्यक्ष कॉमरेड रिंकू देवी, महिला नेत्री कॉमरेड मीणा सिंह और मनोरमा देवी ने किया। मार्च के दौरान नेताओं ने कहा कि महिलाओं और नाबालिग बेटियों के खिलाफ लगातार सामने आ रही घटनाओं से समाज में चिंता का माहौल है। जमुई की घटना को लेकर बिहार के कई जिलों में महिला संगठनों की ओर से विरोध-प्रदर्शन भी किए गए हैं। एपवा नेताओं ने कहा कि छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बेटियों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल रहा है। एपवा नेताओं ने सरकार से पूछे सवाल एपवा जिला अध्यक्ष कॉमरेड रिंकू देवी और महिला नेत्री मीणा सिंह ने बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जमुई में कोचिंग से अपने दोस्त के साथ लौट रही नाबालिग छात्रा के साथ कथित बदसलूकी की घटना बेहद गंभीर है। इस मामले को लेकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। नेताओं ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं के साथ होने वाली घटनाओं को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के कथित बयानों पर भी सवाल उठाए और कहा कि पीड़िताओं को न्याय दिलाने के बजाय यदि ऐसी घटनाओं को छोटा बताने की कोशिश होती है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
जांच अधिकारी को हटाने और मेडिकल रिपोर्ट की जांच की मांग एपवा नेताओं ने दुधमी की नाबालिग छात्रा से जुड़े मामले में जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन ने मांग की कि मामले के अनुसंधानकर्ता को तत्काल हटाया जाए और पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में कराई जाए। नेताओं ने मेडिकल रिपोर्ट में कथित हेराफेरी के आरोपों की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि यौन हिंसा से जुड़े मामलों में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस जांच और चिकित्सकीय प्रक्रिया दोनों निष्पक्ष-पारदर्शी होनी चाहिए। एपवा नेताओं ने कहा कि किसी भी पीड़िता या उसके परिवार पर दबाव नहीं होना चाहिए और आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक या सामाजिक दबाव के जरिए किसी आरोपी को लाभ पहुंचाने के प्रयासों की जांच कराने की भी मांग की।
मार्च में ये रहे शामिल प्रतिवाद मार्च में कलावती देवी, सुनीता देवी, सरिता देवी और सावित्री देवी समेत बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इसके अलावा भाकपा माले के देव प्रखंड सचिव कॉमरेड सुनील यादव, औरंगाबाद प्रखंड सचिव कॉमरेड कैलाश पासवान, युवा नेता व नवीनगर प्रभारी कॉमरेड वीरेंद्र मेहता, नरेश मेहता और मथुरा मेहता सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। मार्च और कार्यक्रम की देखरेख एवं मार्गदर्शन भाकपा माले जिला सचिव कॉमरेड मुनारिक राम ने किया।
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