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चंडीगढ़ से नेपाल भेजी 52 टन राहत सामग्री:प्रशासक कटारिया ने 7 ट्रकों को दिखाई झंडी; आपदा प्रभावितों को तीसरी बार भेजी मदद




चंडीगढ़ से नेपाल में फ्लैश फ्लड से प्रभावित लोगों की मदद के लिए पंजाब स्टेट रेडक्रॉस ने शुक्रवार को राहत सामग्री की तीसरी और अब तक की सबसे बड़ी खेप भेजी। पंजाब लोक भवन से राज्यपाल और पंजाब स्टेट रेडक्रॉस के अध्यक्ष गुलाब चंद कटारिया ने करीब 52 टन राहत सामग्री से लदे सात बड़े ट्रकों को रवाना किया। इस सामग्री की कीमत करीब 1.40 करोड़ रुपए से अधिक है। राहत सामग्री अमेजन की ओर से उपलब्ध कराई गई है। इस मौके पर अमेजन और डोनेटकार्ट फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ पंजाब स्टेट रेडक्रॉस के सचिव शिवदुलार सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। नेपाल रेडक्रॉस ने तैयार की सामग्री खेप में जनरेटर सेट, कंबल, तिरपाल, सोलर लाइट और अन्य जरूरी आपातकालीन राहत सामग्री शामिल है। राज्यपाल कटारिया ने कहा कि राहत सामग्री नेपाल रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से भेजी गई जरूरतों की सूची के अनुसार ही जुटाई गई है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके। नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पंजाब स्टेट रेडक्रॉस की ओर से यह तीसरी बड़ी खेप है। पहली खेप 1 सितंबर को भेजी गई थी। इसमें तीन ट्रकों में 10 लाख रुपए से अधिक कीमत का रेडी-टू-ईट खाना, राशन, कपड़े और अन्य जरूरी सामान भेजा गया था। 18 सितंबर को भी भेजी थी खेप इसके बाद 18 सितंबर को दूसरी खेप भेजी गई, जिसमें करीब 38 लाख रुपए की राहत सामग्री थी। इसे इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेडक्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसायटीज (आईएफआरसी) के माध्यम से नेपाल रेडक्रॉस सोसायटी के समन्वय से भेजा गया था। पंजाब रेडक्रॉस की टीम राहत सामग्री के साथ नेपालगंज इंटरनेशनल बॉर्डर तक गई थी और वहां संबंधित प्रतिनिधियों को सामग्री सौंपी गई थी। पंजाब-चंडीगढ़ से ही खरीदा गया राहत सामान प्रशासक कटारिया ने अमेजन, डोनेटकार्ट और राहत अभियान में सहयोग करने वाले अन्य लोगों का आभार जताया। उन्होंने पंजाब स्टेट रेडक्रॉस की ओर से राहत सामग्री जुटाने, खरीदने और नेपाल भेजने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस खेप का स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक लाभ हुआ है। अमेजन की ओर से दी गई राहत सामग्री पंजाब और चंडीगढ़ क्षेत्र से ही खरीदी गई है। इससे आसपास के कारोबारियों और सप्लायर्स को भी काम मिला है और साथ ही नेपाल में राहत कार्य में मदद पहुंची है।



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