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Rewari Shooter Kamaljeet Wins Gold Medal in 10m Pistol


रेवाड़ी/झज्जर3 घंटे पहले

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जापान के नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में हरियाणा के शूटर्स ने कमाल कर दिया। रेवाड़ी के कमलजीत और झज्जर की सुरुचि ने जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल के मिक्स्ड टीम इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में दूसरा गोल्ड डाल दिया।

इस भारतीय जोड़ी ने कुल 484.6 अंक हासिल किए। सिल्वर मेडल जीतने वाली साउथ कोरिया को 478.0 अंक मिले, जबकि ईरान ने 415.8 अंक के साथ ब्रॉन्ज जीता। खास बात यह है कि इन दोनों खिलाड़ियों की पहली पसंद शूटिंग नहीं थी। सुरुचि को परिवार कबड्‌डी खिलाड़ी बनाना चाहता था, वहीं कमलजीत पहले एथलीट थे, लेकिन इंजरी के बाद इसे छोड़ना पड़ा। इसके बाद शूटिंग में करियर बनाया।

इस उपलब्धि पर दोनों के परिवारों में खुशी का माहौल है। सीएम नायब सैनी ने भी दोनों बधाई देते हुए कहा कि आप दोनों की उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है।

एशियन गेम्स में गोल्ड दिलाने वाली भारतीय जोड़ी के बारे में जानिए…

एशियन गेम्स में कमलजीत के गोल्ड मेडल जीतने पर रेवाड़ी में उनके घर पर खुशी मनाते परिजन। लड्‌डू भी बांटे गए।

एशियन गेम्स में कमलजीत के गोल्ड मेडल जीतने पर रेवाड़ी में उनके घर पर खुशी मनाते परिजन। लड्‌डू भी बांटे गए।

खुशी मनातीं कमलजीत के परिवार की महिलाएं।

खुशी मनातीं कमलजीत के परिवार की महिलाएं।

इंजरी के बाद एथलेटिक्स छोड़ा, तो कमलजीत ने शूटिंग में करियर बनाया

  • बचपन में स्प्रिंट में जाने का था सपना, ट्रेनिंग में लगी चोट : रेवाड़ी के रहने वाले कमलजीत एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनका शुरुआती लगाव शूटिंग से नहीं, बल्कि एथलेटिक्स से था। उन्होंने धावक बनने का सपना देखा था। मगर, साल 2019 में ट्रेनिंग के दौरान गंभीर चोट ली गई। उस वक्त उम्र थी महज 15 साल। यह किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ा झटका था।
  • 15 साल की उम्र में थामी पिस्टल, शुरुआत में आईं दिक्कतें : चोट के बाद कमलजीत ने पिस्टल शूटिंग को अपना नया खेल बनाया। साल 2019 में उन्होंने शूटिंग शुरू की। एथलेटिक्स और शूटिंग की जरूरतें अलग थीं। शूटिंग महंगा खेल है। मैच फीस, यात्रा और महंगी गोलियों का खर्च परिवार के लिए आसान नहीं था। शुरुआती दौर में आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया था कि कमलजीत ने शूटिंग छोड़ने के बारे में भी सोचा।
  • आर्थिक रूप से कमजारे परिवार ने दिया पूरा साथ : कमलजीत के माता-पिता और चाचा ने उनके सपने को आगे बढ़ाने के लिए अपनी बचत तक खर्च की। कमलजीत की यात्रा में उनके गांव के शूटिंग कोच का भी अहम योगदान रहा। उन्होंने कमलजीत को बिल्कुल शुरुआत से तैयार किया।
  • पहले 50 मीटर, फिर 10 मीटर एयर पिस्टल में बनाई पहचान : कमलजीत ने शुरुआत में 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में अपनी पहचान बनानी शुरू की। हालांकि, जल्द ही उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल की बारीकियों को भी समझना शुरू कर दिया। साल 2023 में कमलजीत ने आईएसएसएफ जूनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक भी अपने नाम किया। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण के समर्थन से वह सीनियर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे।
सुरुचि इंदर सिंह फोगाट झज्जर जिले के सासरोली गांव की रहने वाली हैं।

सुरुचि इंदर सिंह फोगाट झज्जर जिले के सासरोली गांव की रहने वाली हैं।

सुरुचि ने 13 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की, ट्रेन से जाती थीं एकेडमी

सुरुचि इंदर सिंह फोगाट झज्जर जिले के सासरोली गांव की रहने वाली हैं। उनकी अंतरराष्ट्रीय शूटिंग यात्रा 13 साल की उम्र में शुरू हुई थी। वह अपने पिता और भाइयों के साथ सासरोली से भिवानी की शूटिंग अकादमी तक ट्रेन से जाती थीं। अब 20 साल की उम्र में वह जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड और कई ISSF वर्ल्ड कप गोल्ड जीत चुकी हैं।

सुरुचि के एशियन गेम्स में गोल्ड जीतते ही सासरोली गांव और उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्वर्णिम उपलब्धियों पर गांव में जश्न मनाया जा चुका है। उन्हें परिवार पहले कबड्‌डी खिलाड़ी बनाना चाहता था।

सीएम नायब सैनी की ओर से दोनों शूटर्स को बधाई दी गई।

सीएम नायब सैनी की ओर से दोनों शूटर्स को बधाई दी गई।

सुरुचि की स्वर्णिम उपलब्धि से झज्जर गौरवान्वित: जिला खेल अधिकारी

जिला खेल अधिकारी शतेंद्र कुमार ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर सुरुचि इंदर सिंह को बधाई दी। उन्होंने कहा कि झज्जर जैसे जिले के एक सामान्य परिवार की बेटी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना पूरे जिले के लिए खुशी और गर्व की बात है। सुरुचि की इस उपलब्धि से जिले के अन्य खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और वे खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे।

शूटर कमलजीत और सुरुचि की उपलब्धियां…

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