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मथुरा के गोवर्धन में अनंत चतुर्दशी पर गिरिराज जी की भव्य छटा देखने को मिली। परिक्रमा मार्ग स्थित गिरिराज तलहटी में भगवान गोवर्धन नाथ को 21 हजार किलो सामग्री से तैयार पकवानों का भोग लगाया गया। गिरिराज जी का बेशकीमती रत्नों से विशेष श्रृंगार किया गया। भाद्रपद पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर हुए इस अलौकिक दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे गिरिराज परिक्रमा मार्ग को हरी-भरी सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। शाम होते ही रोशनी से जगमगाता परिक्रमा मार्ग भक्तों के आकर्षण का केंद्र बन गया। चांदी के कमल और शेषनाग पर विराजे गिरिराज जी छप्पन भोग महोत्सव में गिरिराज महाराज सप्त रत्नों से जड़े चांदी के कमल पुष्प और शेषनाग के फन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे थे। पंडित शरद मुखिया ने भगवान का राजाधिराज स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया। गिरिराज जी को हीरा, मोती, नीलम, पन्ना, पुखराज और गोमेद जैसे रत्नों से सुसज्जित पोशाक धारण कराई गई। साथ ही उन्हें हीरा जड़ी बांसुरी भी पहनाई गई। 21 हजार किलो देशी घी से तैयार हुआ महाप्रसाद महोत्सव में गाय के शुद्ध देशी घी से तैयार 21 हजार किलो महाप्रसाद गिरिराज जी को अर्पित किया गया। इसमें सोने-चांदी के वर्क से सजे विशेष व्यंजन भी शामिल थे। महोत्सव की पूर्व संध्या पर गिरिराज जी का पंचरत्न महाअभिषेक किया गया। सात पवित्र नदियों के जल के साथ दूध, दही, शहद और दिव्य जड़ी-बूटियों से आचार्यों ने मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक कराया। शास्त्रीय संगीत के बीच हुई महाआरती महाआरती के दौरान शास्त्रीय संगीत की स्वर-लहरियों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में हिस्सा लिया और गिरिराज जी के दर्शन किए। श्रीगिरिराज सेवा समिति के संस्थापक मुरारी अग्रवाल ने पंचामृत और पंचरत्न अभिषेक कराया। मुख्य यजमान अशोक कुमार आढ़ती और नीरज गोयल समेत समिति के राघवेंद्र गर्ग, अनमोल बंसल, दिनेश मंगल, राजेंद्र सर्राफ और भगवानदास खंडेलवाल मौजूद रहे।
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गिरिराज जी को 21 हजार किलो पकवानों का भोग:गोवर्धन में चांदी के कमल और शेषनाग पर विराजे महाराज, नवरत्नों से हुआ श्रृंगार
