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- Pandit Vijay Shankar Mehta Column | Teach Children Life Lessons From Shastras
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
शास्त्रों को शुद्ध रखना कठिन काम है। अपने-अपने समय में लोग इनमें घट-जोड़ करते रहेंगे और जरूरी नहीं है कि यह काम विद्वान ही करें। जिसमें जितनी अक्ल होगी, वह शास्त्रों को वही रूप दे देगा। एक शास्त्र है गीता। इसके साथ खूब प्रयोग हुआ, खूब व्याख्याएं की लोगों ने। लेकिन जिसको गीता समझ में आई, वह उसमें कुछ नहीं जोड़ता। क्योंकि, उसका मानना है कि जो मिल गया, वही मिलना था। और जो मिलना था, वह मिल गया तो फिर क्या घट-जोड़।
यहां हम एक खेल का उदाहरण लें- वॉलीबॉल। ‘वॉली’ शब्द का अर्थ है प्रहार करके उछालना। लोगों ने शास्त्रों के शब्दों के साथ अपनी विद्वत्ता को लेकर वॉलीबॉल खेलना शुरू किया और अधिकांश शास्त्रों के साथ यही हो रहा है। उनके शब्दों को समझने, जीने की जगह बस उछाला जा रहा है।
इसीलिए नई पीढ़ी शास्त्रों से दूर हो रही है। उनका कहना है, इतना क्लिष्ट हो गया है सबकुछ कि हमें समझ नहीं आता। तो हम अपने शास्त्रों में घट-जोड़ करने की जगह जो काम की बात है वो निकालें और अपने बच्चों को सौंपें।

