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बठिंडा में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) एम्प्लाइज यूनियन पंजाब की ओर से लंबित मांगों को लेकर सोमवार को बठिंडा में जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ रोष जताते हुए अपनी मांगों का ज्ञापन सिविल सर्जन बठिंडा को सौंपा। यूनियन ने मांग की कि ज्ञापन को उचित माध्यम से पंजाब सरकार और स्वास्थ्य विभाग तक भेजकर मांगों का जल्द समाधान कराया जाए।
यूनियन नेताओं के अनुसार NHM कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। 28 सितंबर के जिला स्तरीय प्रदर्शन के बाद 1 अक्टूबर को विधायकों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन और 9 अक्टूबर को धूरी में राज्य स्तरीय महा रैली का कार्यक्रम घोषित किया गया है। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा। धरने के दौरान रंजीत कौर, अवनीश कुमार, डॉ. बरजिंदर सिंह, बलविंदर कौर, हरदीप चंद, अनीता रानी और दीप गर्ग सहित यूनियन पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। यूनियन नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो 9 अक्टूबर को धूरी में प्रस्तावित रैली के बाद संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें NHM कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान काम के लिए समान वेतन, वेतन में उचित बढ़ोतरी, लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी मामलों का समाधान, ठेका कर्मचारियों को नियमित करना, ग्रेच्युटी का लाभ और सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मामलों का समाधान शामिल है। यूनियन सरकार और स्वास्थ्य विभाग की पिछली बैठकों में दिए गए आश्वासनों तथा फैसलों को लागू करने और लंबित फाइलों का निपटारा करने की मांग भी कर रही है। 13 अगस्त से आंदोलन, पहले भी हो चुके प्रदर्शन
NHM कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 13 अगस्त से राज्य में हड़ताल शुरू की थी। 25 अगस्त को जालंधर में हड़ताल 12वें दिन में पहुंच गई थी और कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना दिया था। इसके बाद 27 अगस्त को भी जालंधर में कर्मचारियों ने प्रदर्शन और मार्च किया। इससे स्पष्ट है कि 28 सितंबर का बठिंडा प्रदर्शन आंदोलन की आगे की चरणबद्ध कड़ी का हिस्सा है। हड़ताल से आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
NHM कर्मचारी जिला अस्पतालों के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), आयुष्मान आरोग्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मेडिकल ऑफिसर, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, ANM, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, RBSK टीम और जिला-ब्लॉक स्तर के कार्यक्रम प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों के काम से दूर रहने पर नियमित ओपीडी, जांच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण और अन्य सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में काम प्रभावित होने की आशंका है। इससे मरीजों को इंतजार बढ़ने, वैकल्पिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जाने और सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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बठिंडा में NHM कर्मचारियों ने शुरू किया धरना:मांगों को लेकर सिविल सर्जन को सौंपा ज्ञापन,9 अक्टूबर को धूरी में राज्य स्तरीय रैली की चेतावनी;
