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सिलाई मशीन दिलाने के नाम पर 1.66 लाख की ठगी:NGO सदस्य बताकर महिलाओं से ली रकम, ऑनलाइन भुगतान के बाद न मशीन मिली न रुपये लौटाए, FIR दर्ज




छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में सिलाई मशीन दिलाने के पर 92 महिलाओं से 1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी की गई है। जहां एक महिला ने खुद को NGO का सदस्य बताकर ठगी की घटना को अंजाम दिया। बाद में जब न तो सिलाई मषीन मिला और न ही रुपये वापस मिले तो मामले में रिपोर्ट दर्ज कराया गया। मामला कोतरा रोड थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के मुताबिक किरोड़ीमल नगर निवासी श्वेता साहू 38 साल ने थाना में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि वह उच्चभिटठी रोड किरोड़ीमल नगर मे विश्वकर्मा फेब्रिकेशन के सामने आकृति सिलाई सेंटर का संचालन करती है। उसके साथ अन्य 91 महिलाएं कार्यरत हैं। जहां 10 दिसंबर 2025 को एक महिला सिलाई सेंटर पहुंची थी। उसने अपना नाम इशिता विश्वकर्मा निवासी ग्राम लछनपुर, बाबा डेरा, जिला जांजगीर-चांपा बताया। महिला ने सिलाई सेंटर में काम करने वाली महिलाओं को बताया कि वह NGO से जुड़ी है और महिलाओं को सिलाई सिखाने के साथ ही मुख्यमंत्री योजना के तहत सिलाई मशीन दिलाने का काम करती है।
महिलाओं के दो समूह बनाए गए
आरोपी इशिता ने बताया कि सिलाई मशीन के लिए प्रत्येक महिला को फॉर्म फीस के रूप में 550 रुपए और 1500 रुपए जमा करने होंगे। इसके बाद शासन की ओर से 15 हजार रुपए की सहायता राशि और सिलाई मशीन दी जाएगी। उसकी बातों पर विश्वास कर महिलाओं के दो समूह बनाए गए।
ऑनलाइन भुगतान करने की बात कही
शुरुआत में महिलाओं ने उसे 260-260 रुपए नकद दिए। बाद में महिला ने काम बढ़ने की बात कहते हुए सिलाई सेंटर आना बंद कर दिया। उसने महिलाओं को ऑनलाइन भुगतान करने के लिए भवानी च्वाइस सेंटर का मोबाइल नंबर दिया। तब एक समूह की करीब 45 महिलाओं से रकम एकत्र कर अलग-अलग किश्तों में लगभग 70 हजार रुपए बताए गए मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन भेजे गए।
कुल 1.66 लाख रुपए जमा किए गए
इसके अलावा दूसरे समूह की सुरुचि साहू ने करीब 47 महिलाओं से लगभग 96 हजार रुपए एकत्र कर ऑनलाइन भुगतान किया। कुछ महिलाओं ने अपने स्तर पर भी राशि भेजी। इस तरह महिलाओं के अनुसार कुल करीब 1.66 लाख रुपए जमा किए। राशि जमा करने के करीब दो माह बाद उन्होंने इशीता विश्वकर्मा से सिलाई मशीन के संबंध में जानकारी मांगी। तब इशिता ने अलग-अलग कारण बताते हुए मशीन देने में टालमटोल करती रही।
आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज
कई महीने बीत जाने के बाद भी मशीन नहीं मिली और जमा रकम भी वापस नहीं की गई। तब महिलाओं ने इशिता विश्वकर्मा से उसके NGO के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन वह स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही थी। तब उन्हें उसका आधारकार्ड मिला जिसमें उसका नाम ईशु घसिया दर्ज है। ऐसे में महिलाएं समझ गई कि वे धोखाधड़ी का शिकार हो गई है। जिसे देखते हुए श्वेता ने रिपोर्ट दर्ज कराई। जहां पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।



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