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नागौद विधानसभा से तीन बार विधायक रहे रामप्रताप सिंह का सोमवार शाम 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। पूर्व विधायक को 27 सितंबर को तबियत बिगड़ने पर एयरलिफ्ट किया गया था। दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर रिसर्च सेंटर में उनका इलाज चल रहा था। निधन की खबर मिलते ही सतना जिले में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के मुताबिक उनकी पार्थिव देह मंगलवार सुबह तक सतना पहुंचने की उम्मीद है। 3 अक्टूबर 1946 को जन्मे रामप्रताप सिंह का राजनीतिक सफर लंबा रहा। वे दो बार जनपद अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष और अपेक्स बैंक के संचालक सहित कई पदों पर रहे। उन्होंने 1985 और 1990 में कांग्रेस के टिकट पर नागौद विधानसभा सीट से चुनाव जीता। 1998 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और झोपड़ी चुनाव चिन्ह पर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नागौद राजपरिवार के रामदेव सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम त्रिपाठी को हराया था। जनता के दबाव पर लड़ा था निर्दलीय चुनाव 1998 में टिकट कटने के बाद धवारी स्थित उनके घर पर क्षेत्र के सैकड़ों लोग पहुंचे थे। लोगों ने उनसे निर्दलीय चुनाव लड़ने की मांग की। इसके बाद रामप्रताप सिंह ने चुनाव लड़ने से पहले क्षेत्र के लोगों से अंतर्देशीय कार्ड के जरिए राय मांगी थी। उनके मुताबिक जवाब में बोरे भरकर लोगों के संदेश पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। नर्मदा जल लाने के लिए किए आंदोलन रामप्रताप सिंह ने सतना जिले में नर्मदा का पानी लाने के लिए लंबे समय तक आंदोलन किए। विधायक रहने के दौरान और उसके बाद भी वे इस मांग को लेकर सक्रिय रहे। उन्होंने नर्मदा लाओ संघर्ष समिति बनाई और कई बार सरकार के सामने मांग उठाई। हालांकि सतना में नर्मदा जल लाने का उनका सपना पूरा नहीं हो सका।
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नागौद से 3 बार विधायक रहे रामप्रताप सिंह का निधन:नर्मदा लाओ संघर्ष समिति के अगुआ रहे, कैंसर से जूझते हुए दिल्ली में ली अंतिम सांस
