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Jitu Patwari Anger Controversy | MP Congress Protest Video News baat khari hai


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कार्यकर्ताओं के जोश से परेशान हुए पटवारी मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने ही कार्यकर्ताओं के जोश और उत्साह से परेशान हो गए। एक मौके पर तो उनका गुस्सा भी फूट पड़ा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को डांट लगाई और उन्हें हटाते-धकेलते नजर आए। प्रदर्शन के दौरान जीतू पटवारी के संघर्ष के साथ ही कई रोचक नजारे भी देखने को मिले।

हुआ यूं कि कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भोपाल में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का घेराव करने निकले थे। इस दौरान कांग्रेस के एक कार्यकर्ता को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनाया गया। उसे जीतू पटवारी और उमंग सिंघार जंजीर में जकड़कर ले जाते नजर आए।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं में आगे चलने और सीनियर नेताओं के साथ नजर आने की होड़ मची रही। जीतू पटवारी बार-बार कार्यकर्ताओं से रास्ता छोड़ने की गुहार लगाते रहे। बात नहीं बनी तो गुस्से में आकर वे कार्यकर्ताओं पर चिल्लाए भी। उन्हें हटाते और धकेलते नजर आए।

पैदल मार्च के दौरान कार्यकर्ता ‘जीतू भैया संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’ के नारे भी लगा रहे थे। लेकिन उन्हीं कार्यकर्ताओं के जोश और उत्साह के बीच जीतू पटवारी को आगे आने के लिए संघर्ष करते देखा गया। कुल मिलाकर जीतू पटवारी ज्यादातर समय क्राउड मैनेजमेंट करते दिखे।

जोश इतना था कि पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी बैरिकेड पर चढ़ गए। हालांकि, जब उनसे चढ़ा नहीं गया तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें खींचकर ऊपर चढ़ाया। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए पीसी शर्मा ने कहा- ‘इंदेश कुमार का इस्तीफा चाहिए।’ जबकि पूरी कांग्रेस मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगती रही।

इधर, प्रदर्शन के दौरान सागर जिले के बांदा से पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी के जूते भी गायब हो गए। इसके बाद वे नंगे पैर चलते नजर आए।

खरी बात ये रही कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश और उत्साह ही कांग्रेस नेताओं के लिए परेशानी का सबब बन गया।

कांग्रेस के प्रदर्शन में अपने ही कार्यकर्ताओं के जोश से परेशान हो गए पटवारी।

कांग्रेस के प्रदर्शन में अपने ही कार्यकर्ताओं के जोश से परेशान हो गए पटवारी।

अब ‘घंटी’ लेकर आए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ‘घंटा’ के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अब ‘घंटी’ लेकर आ गए हैं। अपने एक बयान को लेकर वे फिर सुर्खियों में हैं और एक बार फिर कांग्रेस के निशाने पर हैं।

हुआ यूं कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आगर जिले के सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी के प्रचार के लिए पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा कि भाजपा को जिताया तो विकास मिलेगा, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी जीता तो ‘घंटी’ मिलेगी।

चूंकि कैलाश विजयवर्गीय नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री हैं, इसलिए उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी की ओर इशारा करते हुए कहा- ‘ये आएंगे तो इन्हें एक बॉक्स दूंगा कि इसे सुसनेर में जाकर खोलना।’

उन्होंने आगे कहा- ‘अगर ये गलती से जीतकर आ गए और बॉक्स खोलेंगे तो उन्हें मिलेगी एक घंटी, बजाने के लिए।’

इसके बाद उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से कहा- ‘अब आपको तय करना है, आपको विकास करना है या घंटी बजवाना है? घंटी बजवाना है तो भेज दो कांग्रेस का।’

विजयवर्गीय के इस बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस इसे मतदाताओं को सीधे दी गई धमकी बता रही है। साथ ही पार्टी ने बयान को मंत्री का अहंकार और घनघोर घमंड करार दिया है।

सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष पद पर उपचुनाव में प्रचार करते मंत्री विजयवर्गीय।

सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष पद पर उपचुनाव में प्रचार करते मंत्री विजयवर्गीय।

जल संकट पर लोगों ने जल संसाधन मंत्री को घेरा जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ सुनने पहुंचे थे। लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्र के एक गांव में जनता ने मंत्री को अपने मन की बात सुना दी। गांव में जल संकट को लेकर लोगों ने मंत्री को घेर लिया और जमकर अपनी भड़ास निकाली।

मामला मंत्री तुलसी सिलावट के विधानसभा क्षेत्र सांवेर के एक गांव का है। यहां जल संकट से परेशान ग्रामीणों ने मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। बताया जा रहा है कि जब जनता की नाराजगी कैमरे में रिकॉर्ड होने लगी तो मंत्री के बेटे ने मोबाइल बंद करा दिया।

इससे पहले जनता का गुस्सा देखकर मंत्री काफी देर तक बाहर नहीं आए। फिर बाहर आए तो लोगों ने खरी-खरी सुनाई। लेकिन नेता जी तो नेता जी ठहरे। लोगों को आश्वासन और भरोसा दिया और वहां से रवाना हो गए।

जल संकट से परेशान लोगों ने जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का घेराव किया।

जल संकट से परेशान लोगों ने जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का घेराव किया।

और अब अंदर की बात..

क्लाइंट लाने का कॉम्पिटिशन एक बड़े संभाग में पदस्थ एडिशनल कमिश्नर के बेटे और उनके पीए के बीच अलग ही कॉम्पिटिशन चल रहा है। दरअसल, साहब के पास राजस्व के मामले निपटाने की जिम्मेदारी है। यानी जमीनों से जुड़े विवादों पर फैसला करने का काम।

अब इन्हीं मामलों को साहब तक पहुंचाने में उनके बेटे और पीए बिचौलिये की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों खुद आगे रहकर राजस्व केस से जुड़े लोगों से बातचीत कर रहे हैं। सुना है कि फाइल साहब की टेबल तक तभी पहुंचती है, जब इनमें से कोई उसे धक्का लगाए।

हालांकि, दोनों के बीच अंडरस्टैंडिंग भी ऐसी है कि अगर एक को पता चल जाए कि क्लाइंट की दूसरे से बात हो चुकी है, तो वह फिर उसमें दखल नहीं देता। बता दें कि ये साहब पूर्व सीएम के जिले में कलेक्टर भी रह चुके हैं।

इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), विनय यादव (इंदौर), मनीष मारू (आगर)

ये भी पढ़ें – बप्पा की विदाई में पंडित प्रदीप मिश्रा ने ली रिस्क: एक दिन में ही टूट गई मंत्री विजयवर्गीय की कसम

मीडिया से बात नहीं करने की मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कसम एक ही दिन में टूट गई। वे मीडिया के सामने भी आए और बात भी की। दरअसल, गुरुवार को एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने उनसे बात करनी चाही तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा था कि वे इंदौर के मीडिया से बात नहीं करेंगे। पूरी खबर पढ़ें



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