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सुल्तानपुर गल्ला मंडी में व्यापारियों के आरोपों से गिरे भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा जो आरोप व्यापारी बंधुओं द्वारा लगाए गए हैं उन सभी आरोपों को मैं सिरे से खारिज करता हूं। उन्होंने कहा अमेठी वाड़ा की 1956/63 में कुछ लोगों को ये जमीन दी गई थी। इसी का मुकदमा सिविल कोर्ट में चल रहा था। खारिज होने के बाद नगर पालिका ने वहां के दुकानदारों से किराए की वसूली शुरू की और नगर पालिका ही उस जमीन पर काबिज रही। बता दें कि सोमवार रात 10 बजे उन्होंने मीडिया से बात किया है। 1983 में नगर पालिका द्वारा लखनऊ हाईकोर्ट में सेकेंड अपील दायर की थी। 1983 से लगातार सुनवाई चलती रही। जनवरी 2020 में वो सेकेंड अपील खारिज हो गई। दिसंबर 2020 में नगर पालिका ने रेस्टोरेशन एप्लीकेशन दायर किया। 5 साल तक लिस्टिंग न होने की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी और जुलाई 2025 में वो एप्लीकेशन भी खारिज हो गई। जानकारी हमें मिली, 10 दिन पहले नगरपालिका ने फिर से लखनऊ हाईकोर्ट में सुनवाई याचिका दायर की है। जो भी निर्णय न्यायालय का आएगा, नगर पालिका उसका पालन करेगी। कई प्रमुख व्यापारी हमारे पास आए थे, जिनको डर था कि दुकान खाली कराई जाएगी। हमने उनको आश्वस्त किया है कि नगरपालिका को आपकी दुकान खाली कराने का कोई अधिकार नहीं है और न ही नगर पालिका ने कोई नोटिस दिया। आप जैसे काम कर रहे हैं वैसे करते रहिए, किराया जमा करना चाहते हैं तो जमा कर सकते हैं। जो प्रदर्शन हुआ वो सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया। बाहरी तत्वों द्वारा गल्ला मंडी के व्यापारियों को, जो हमारे परिवार जैसे हैं, भ्रमित करके सिर्फ मेरे खिलाफ ये प्रदर्शन कराया। प्रदर्शन में कुछ ऐसे चेहरे थे जिनका गल्ला मंडी के व्यापारियों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। सिर्फ राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए ये प्रदर्शन किया गया। मैं मीडिया चैनलों के माध्यम से अमेठी वाड़ा स्थित सभी व्यापारी भाइयों को फिर से आश्वस्त करता हूं कि वो कतई परेशान न हों। जब तक मैं इस कुर्सी पर बैठा हूं, तब तक उनकी दुकानें हटाने जैसा कोई कृत्य नगर पालिका द्वारा नहीं किया जाएगा।
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सुल्तानपुर गल्ला मंडी विवाद, अध्यक्ष ने आरोपों को नकारा:बोले- व्यापारियों को किया गया भ्रमित, जमीन के विवाद से जुड़ा है मामला
