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वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और भारतीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की सदर लोकल कमेटी ने मंगलवार को मंडी के सेरी चांदनी में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन देश की वामपंथी पार्टियों के आह्वान पर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे राष्ट्रव्यापी विरोध कार्यक्रम के तहत किया गया। प्रदर्शन के दौरान माकपा नेताओं ने 23 सितंबर को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर कई मौकों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा केवल SIR प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनाव आयोग की पारदर्शिता, स्वतंत्रता और आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला है।
चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता डेटाबेस का केंद्रीकरण करने और राज्य व निर्वाचन क्षेत्र स्तर के अधिकारियों की पहुंच को सीमित करने से पूरी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बुरा असर पड़ सकता है। इस दौरान पार्टी ने गोवा में सॉफ्टवेयर से जुड़ी कथित पाबंदियों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था से स्थानीय अधिकारियों के निर्णय लेने की स्वतंत्र प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग विरोध प्रदर्शन के अंत में माकपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने, वर्तमान SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकने और गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए गए नागरिकों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही पार्टी ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की भी पुरजोर मांग उठाई।
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माकपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की:मंडी में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
