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गंडक में उफान के बीच पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने लोगों ने राहत से ज्यादा स्थायी समाधान की मांग रखी। कहीं ग्रामीणों ने सालों से टूट रहे तटबंध को पक्का कराने की मांग की, तो कहीं पुल नहीं बनने से हर साल करीब 2 हजार एकड़ फसल बर्बाद होने की बात कही। राहत शिविर में मौजूद लोगों ने खाने, रोशनी, मेडिकल सुविधा और सुरक्षित जगह तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री बुधवार को बगहा, बैरिया के बथना, योगापट्टी के मच्छरगांवा और नौतन के शिवराजपुर-बनकटवा समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे करने पहुंचे थे। बथना के राहत शिविर में उन्होंने लोगों से बातचीत की और सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, पेयजल, शौचालय और आवासन की व्यवस्था देखी, लेकिन मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कई जगह लोगों की नाराजगी भी सामने आई। लोगों का कहना था कि बाढ़ हर साल आती है, तटबंध हर साल कमजोर होता है, राहत की व्यवस्था बाढ़ आने के बाद शुरू होती है और पानी उतरने के बाद समस्या फिर वहीं रह जाती है। ग्रामीण बोले- व्यवस्था समय पर होती तो सीएम को यहां आने की जरूरत नहीं पड़ती मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखते हुए स्थानीय निवासी रामाशंकर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का यहां आना अच्छा है, लेकिन अगर शासन-प्रशासन की व्यवस्था समय पर काम करती तो उन्हें खुद यहां आने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, आप आए हैं, जनता आपका स्वागत करती है, लेकिन आपको यहां आने की जरूरत ही नहीं पड़ती। अगर शासन-प्रशासन की व्यवस्था सही होती। आप वहां से सिर्फ निर्देश दे देते तो यहां सारी सुविधाएं पहुंच जातीं। ग्रामीणों का कहना था कि बाढ़ से निपटने के लिए पहले से सिस्टम और संसाधन मौजूद हैं। अगर इनका इस्तेमाल समय पर किया जाता तो लोगों को बाढ़ के बीच परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। रामाशंकर ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर जनप्रतिनिधि और प्रशासन समय रहते सक्रिय होते तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती। 30 साल से बांध की समस्या, हर साल डर लगता है बचाना पंचायत के सरपंच पति रामवीर यादव ने बताया कि उनके इलाके में बांध की समस्या करीब 30 साल पुरानी है। हर साल बाढ़ के दौरान बांध को लेकर ग्रामीणों में डर बना रहता है। उन्होंने कहा, “पिछले करीब 30 साल से इस बांध को लेकर समस्या बनी हुई है। हर साल बाढ़ आती है और हमारी जान सांसत में रहती है। बांध कमजोर होने के कारण डर रहता है कि कब पानी गांव में घुस जाए।” उनका कहना है कि ग्रामीण लंबे समय से बांध को मजबूत और पक्का कराने की मांग कर रहे हैं। बाढ़ आने के समय अधिकारी और जनप्रतिनिधि सक्रिय होते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में बांध की स्थिति की नियमित निगरानी नहीं होती। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने अपनी यह समस्या उनके सामने रखी। मुख्यमंत्री की ओर से बांध को लेकर काम कराने का आश्वासन दिया गया है। बचपन से बांध पक्का होने का आश्वासन सुन रहा हूं फतुहा पंचायत के मोहम्मद शदरुद्दीन ने कहा कि वे बचपन से बांध के टूटने और उसके पक्कीकरण की बात सुनते आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरी उम्र 32 साल हो गई है। जब से छोटा था, तब से सुनता आ रहा हूं कि हमारा बांध टूट गया, टूटने वाला है या टूट रहा है। हर बार आश्वासन मिलता है कि बांध का पक्कीकरण होगा और अगले साल समस्या नहीं आएगी।” शदरुद्दीन के मुताबिक इस बार मुख्यमंत्री ने भी बांध को पक्का कराने और मजबूत करने का आश्वासन दिया है। अब ग्रामीण चाहते हैं कि यह आश्वासन जमीन पर दिखाई दे। उन्होंने बताया कि वे रात करीब 10:30 बजे बांध टूटने वाली जगह पर गए थे। उनके मुताबिक उस समय वहां प्रशासन की ओर से न रोशनी की व्यवस्था थी, न खाने-पीने और मेडिकल सुविधा की। “1993 में कट गया था बथना का हिस्सा, तब से पक्कीकरण की मांग” स्थानीय निवासी एमडी अतीउल्ला ने बताया कि वर्ष 1993 में बाथना गांव का हिस्सा बाढ़ में कट गया था। इसके बाद से ग्रामीण लगातार बांध के पक्कीकरण की मांग करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ के दौरान समस्या दोहराती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उनका कहना था कि स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों से भी ग्रामीण कई बार समस्या बता चुके हैं। अतीउल्ला के मुताबिक, “मुख्यमंत्री जी ने हमारी बात सुनी और बांध के पक्कीकरण के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया है। अब उम्मीद है कि वर्षों से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान होगा।” 2 हजार एकड़ फसल हर साल बर्बाद एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि चखवार पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। यहां पुल नहीं होने के कारण हर साल करीब 2 हजार एकड़ की फसल बाढ़ की चपेट में आ जाती है। ग्रामीण ने कहा कि यही उनका घर और खेती का इलाका है। हर साल बाढ़ आने के बाद बांध और दूसरे इंतजामों पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन बाढ़ खत्म होने के बाद स्थायी समाधान के लिए काम नहीं होता। उन्होंने कहा, “जब पानी बढ़ता है और बाढ़ आती है, तभी अधिकारी और जनप्रतिनिधि सक्रिय होते हैं। पानी कम होने के बाद थोड़ा-बहुत छिड़काव या मरम्मत कराकर काम पूरा मान लिया जाता है। हर साल हम लोगों को इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है।” ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से पुल बनवाने और बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। राहत शिविर में भी सामने आईं लोगों की परेशानियां मुख्यमंत्री जब बथना के राहत शिविर पहुंचे तो वहां लोगों ने अपनी समस्याएं बताईं। शिविर में सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, पेयजल, शौचालय और रहने की व्यवस्था की गई थी। मुख्यमंत्री ने खुद लोगों को भोजन भी परोसा। लेकिन कुछ ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ के शुरुआती समय में कई जगह राहत पहुंचने में देरी हुई। लोगों के मुताबिक रात में अंधेरा, भोजन और मेडिकल सुविधा की कमी जैसी समस्याएं सामने आईं। एक ग्रामीण ने कहा कि बाढ़ के पानी से निकलकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचे लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय, रोशनी, भोजन और जरूरी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। “सम्राट चौधरी भैया, हमारी रक्षा कीजिए… बच्चे भूखे हैं” बाढ़ प्रभावित महिला साह देवी ने मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने कहा, “यहां पानी भर गया है। रास्ता बनवाइए और हमारे बच्चों की भी मदद कीजिए। पानी के कारण हम बहुत परेशान हैं।” महिला ने बताया कि उनके बच्चे कई दिनों से खाने की समस्या झेल रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से बाढ़ में फंसे लोगों तक भोजन और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने की अपील की। मुख्यमंत्री के राहत शिविर से निकलने के बाद कुछ बाढ़ प्रभावित लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई। मौके पर नारेबाजी भी हुई। एक महिला मुख्यमंत्री से मिलने के लिए सुरक्षा घेरा पार कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी। सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोक दिया। महिला मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश करते हुए अपनी परेशानी बताना चाहती थी। उसका कहना था कि बाढ़ में उसका सबकुछ बह गया है। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जताई। विधायक विनय बिहारी पहले ही दे चुके थे धरना बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था को लेकर जनप्रतिनिधियों की नाराजगी भी सामने आई है। भाजपा विधायक विनय बिहारी ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देकर बाढ़ पीड़ितों तक पर्याप्त मदद पहुंचाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान विनय बिहारी ने उनसे मुलाकात की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हेलिकॉप्टर से पूरे जिले का दौरा किया और उनसे भी बात की। विधायक ने बाढ़ प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की मांग रखी। यानी एक तरफ ग्रामीण लंबे समय से तटबंध और पुल जैसी स्थायी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा बाढ़ में राहत और बचाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। तटबंध टूटने के बाद खेत-गांव में घुसा पानी गंडक में बढ़े जलस्तर के बीच पश्चिम चंपारण में कई जगह तटबंध टूटने से स्थिति और गंभीर हुई। बगहा-1 के सिंघाड़ी पिपरिया पंचायत के खैरटवा गांव में करीब 200 फीट तटबंध टूटने की बात सामने आई। बैरिया के फुलियाखांड़ गांव के पास भी करीब 200 फीट तटबंध ध्वस्त हुआ। बथुवरिया में शिव मंदिर के पास करीब 15 फीट तटबंध टूटने की जानकारी दी गई। फुलियाखांड़ पंचायत के वार्ड-5 के पास पहले से तटबंध में रिसाव हो रहा था। रात में पानी का दबाव बढ़ने के बाद यह टूट गया। सूचना मिलने के बाद जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तेज बहाव के कारण मरम्मत कार्य में चुनौती आई। तटबंध टूटने से फुलियाखांड़, श्यामपुर और शिवराजपुर समेत कई गांवों में पानी फैल गया। खेतों में पानी भरने से फसल को नुकसान की चिंता भी बढ़ गई है। सीएम ने दिए ये निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदियों के जलस्तर, तटबंध और कटाव की लगातार निगरानी की जाए। जरूरत के अनुसार पानी की निकासी के लिए स्लुइस गेट खोले जाएं। उन्होंने पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था रखने, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की तैनाती बनाए रखने तथा प्रभावित लोगों तक सूखा राशन और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने को कहा। पशुओं के लिए चारा और आश्रय की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को दशहरा से पहले 7 हजार रुपए प्रति परिवार की अनुग्रह सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक लोग अपने घर वापस नहीं लौट जाते और स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई संचालित की जाए। ग्राउंड से सबसे बड़ा सवाल बाढ़ के बीच पश्चिम चंपारण में ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग राहत से आगे जाकर स्थायी समाधान की है। लोगों का कहना है कि हर साल तटबंध टूटने, खेत डूबने और गांवों में पानी घुसने के बाद राहत कार्य शुरू होता है। पानी उतरने के साथ ही निगरानी और मरम्मत भी धीमी पड़ जाती है। ग्रामीणों की मांग साफ है—इस बार सिर्फ राहत नहीं, तटबंध का स्थायी पक्कीकरण, पुल का निर्माण और बाढ़ से बचाव की ऐसी व्यवस्था हो, जिससे अगले साल उन्हें फिर वही कहानी न दोहरानी पड़े।
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पश्चिम चंपारण में गंडक के उफान से तटबंध टूटे:CM से ग्रामीण बोले- 30 साल से बांध पक्का कराने की मांग, अब तक स्थायी समाधान नहीं
