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जगराओं में कूड़ा डंप के खिलाफ संगठनों ने खोला मोर्चा:मंदिरों के पास लगे गंदगी के ढेर से हजारों लोगों पर बीमारियों का खतरा




लुधियाना के जगराओं शहर के वार्ड नंबर 6 (अड्डा रायकोट से कोठे पोना जाने वाले मार्ग) पर स्थित मंदिरों व रिहायशी इलाके के नजदीक जमा कूड़े के पहाड़ों से परेशान लोगों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। बीमारियों के बढ़ते खतरे और नगर कौंसिल की अनदेखी से नाराज धार्मिक संगठनों, समाजसेवियों और स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर नगर कौंसिल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने पहले कूड़े के ढेरों के समक्ष खड़े होकर रोष जताया और फिर नगर कौंसिल कार्यालय पहुंचकर दफ्तर का घेराव करते हुए कौंसिल प्रधान व ईओ के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। धार्मिक स्थलों व आबादी के बीच डंप बनाने का विरोध प्रदर्शन में शामिल कोठे पोना के सरपंच गुरतेज सिंह, हरप्रीत सिंह सग्गू, गौरव सोनी, अमरजीत सिंह और हरिंदर सिंह ने बताया कि पुराने शिव मंदिर के पास बड़े-बड़े कूड़े के ढेर लगा दिए गए हैं। आरोप है कि नगर कौंसिल अब इस जगह को स्थायी ‘कूड़ा डंप’ घोषित करने की तैयारी में है। प्रदर्शनकारियों ने दोटूक कहा कि धार्मिक स्थलों के आसपास स्वच्छ वातावरण होना चाहिए, लेकिन नगर कौंसिल लोगों की सेहत को खतरे में डाल रही है। उन्होंने कहा, “यदि नेताओं को डंप बनाना ही है, तो पहले वे अपने घरों के आसपास इसकी शुरुआत करें।” लोगों ने बताया कि इलाके के 8 धार्मिक स्थलों की ओर से पहले भी ईओ व प्रधान को मांग-पत्र सौंपे जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। 15 दिनों में कूड़ा हटाने का आश्वासन, मशीन लगाने पर फिर बढ़ा तनाव जनता के भारी विरोध को देखते हुए नगर कौंसिल के ईओ मोहित शर्मा और प्रधान कंवरपाल सिंह ने प्रदर्शनकारियों से बात की और 15 दिनों के भीतर कूड़े के पहाड़ों को पूरी तरह हटाने का लिखित/मौखिक भरोसा दिया। हालांकि, इसके तुरंत बाद माहौल उस समय फिर तनावपूर्ण हो गया जब नगर कौंसिल ने कूड़े की छंटाई के लिए उसी जगह मशीन लगाने का प्रस्ताव रखा। प्रदर्शनकारियों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए साफ कर दिया कि वे वहां कोई मशीन नहीं लगने देंगे। यदि नगर कौंसिल को छंटाई करनी है, तो किसी गैर-रिहायशी जगह का चयन करे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कूड़ा नहीं हटाया गया, तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा। फिलहाल सभी की नजरें कौंसिल द्वारा दी गई 15 दिन की समयसीमा पर टिकी हैं।



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