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सरकारी कर्मचारी की सिर्फ सैलरी देखकर बच्चे को ओबीसी क्रीमीलेयर में नहीं मान सकते। हाई कोर्ट ने कहा कि माता-पिता का पद, सेवा श्रेणी, प्रमोशन और आय का स्वरूप भी देखना जरूरी है। मामला सिविल जज की बेटी रागिनी राठौर का है, जिनका आवेदन पिता की 16.99 लाख रु
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…तो फिर क्रीमीलेयर कैसे तय होगी? पद और प्रमोशन भी देखना होगा: माता-पिता किस सरकारी पद और सेवा श्रेणी में नियुक्त हुए और प्रमोशन कब मिला, यह अहम होगा। रागिनी के पिता सिविल जज क्लास-II से 40 वर्ष की उम्र पार करने के बाद क्लास-I बने थे। सिर्फ सैलरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार केवल वेतन की रकम के आधार पर किसी को क्रीमीलेयर नहीं माना जा सकता। पद और सेवा-स्थिति से जुड़े नियम भी लागू होंगे। आय की प्रकृति भी अहम: वेतन और कृषि भूमि से होने वाली आय को अन्य स्रोतों की आय के साथ मशीनी तरीके से जोड़कर आय-संपत्ति परीक्षण नहीं किया जा सकता।
