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सीकर में रोहित गोदारा गैंग का बदमाश बरी:लाखों रुपए के सोने की लूट मामले में कोर्ट का फैसला, सबूतों के अभाव में हुआ रिहा




सीकर में 5 साल पुरानी सोने की लूट के मामले में पुलिस ने रोहित गोदारा गैंग से जुड़े बदमाश कमलदीप उर्फ कमल को बरी कर दिया। इस मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में पेश नहीं किए,आरोपियों की पहचान परेड नहीं करवाने जैसी लापरवाहियां बरती। जिसके चलते सीकर की एडीजे कोर्ट 2 की जज डॉ. वीनू नागपाल ने आरोपी को बरी किया है। एडवोकेट रघुनाथराम सुला ने बताया कि 6 नवंबर 2021 को सीकर के कोतवाली पुलिस थाने में श्याम सुंदर सोनी ने मुकदमा दर्ज करवाया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि वह रात को करीब 9 बजे दुकान बंद करके लौट रहे थे। तब उनके पास करीब 1.07 किलोग्राम सोना था। जैसे ही वह सीकर शहर में अरिहंत हॉस्पिटल वाली गली में पहुंचे तो वहां पर एक स्विफ्ट कार आई। जिसमें ड्राइवर के पास वाली सीट से एक आदमी उतरा और उसने हथियार दिखाकर बैग छीन लिया। बैग में सोने के अलावा डॉक्यूमेंट सहित अन्य सामान था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले में कुल 11 आरोपी कमलदीप उर्फ कमल, अभिषेक,पंकज कुमार, शुभम सोनी, प्रदीप धनकड़,अरुण धनखड़, दीपक मलिक, कुलदीप धनकड़, दीपेश सोनी,कृष्ण मलिक और खुवेंद्र को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट में ट्रायल चलने के दौरान ही एक आरोपी कृष्ण की मौत हो चुकी थी। ऐसे में उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई बंद कर दी गई। इसके बाद 18 फरवरी 2026 को 8 आरोपी अभिषेक, पंकज, शुभम, प्रदीप,अरुण,दीपक, कुलदीप और दीपेश को कोर्ट ने बरी कर दिया था। जबकि कमलदीप और खुवेंद्र फरार चल रहे थे। बाद में कमलदीप को हरियाणा की जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार करके पेश किया गया और अब उसको कोर्ट के द्वारा बरी किया गया है। हालांकि, मामले में अभी खुवेंद्र की गिरफ्तारी होना बाकी है। इस मामले में कोर्ट के द्वारा माना गया है कि परिवादी श्याम सुंदर सोनी के द्वारा जो मुकदमा दर्ज करवाया गया और कोर्ट में जो बयान दिए गए उनमें ही फर्क है। मुकदमे में 1070 ग्राम सोना बताया जा रहा है जबकि कोर्ट में बयान दिया गया कि 470 ग्राम सोना ही वह लेकर गया। बाकी 600 ग्राम सोना उनके बेटे के द्वारा घर पर ले जाया गया। पुलिस ने इस मामले में श्याम सुंदर सोनी के बेटे रवि को गवाह नहीं बनाया। मुकदमे में 1.80 लाख रुपए लूट होने की भी बात सामने आई है लेकिन उनकी बरामदगी ही नहीं हुई। पुलिस ने घटना में शामिल जो गाड़ी जप्त की उसके मालिक से कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं दिया गया। परिवादी श्याम सुंदर सोनी का कहना था कि लूट करने वालों ने पिस्तौल दिखाकर लूट की वारदात को अंजाम दिया लेकिन इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर कन्हैयालाल ने इस मामले में कोई भी हथियार जब्त नहीं किया है। न ही उन्होंने अपनी जांच में घटना में पिस्तौल का उपयोग होना माना है। इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर कन्हैयालाल ने कोर्ट में कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों को आईडेंटिफाई करके गिरफ्तार किया गया। लेकिन ऐसा कोई भी सीसीटीवी या फोटोग्राफ कोर्ट में पेश नहीं किया गया जबकि घटनास्थल के आसपास घनी आबादी क्षेत्र है। जहां बड़े अस्पताल और शोरूम आदि है। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों की मौका तस्दीक करवाई,वहां भी कोई स्वतंत्र गवाह नहीं बनाया गया। इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर कन्हैयालाल ने इस मामले में आरोपियों की पहचान परेड भी नहीं करवाई। पहली बार परिवादी श्यामसुंदर ने आरोपियों को कोर्ट में ही पहचाना था। कोर्ट का इस मामले में कहना है कि पुलिस के द्वारा आरोपियों को बापर्दा गिरफ्तार किया जाना था लेकिन उन्होंने गंभीर लापरवाही बरतते हुए खुले चेहरे के साथ आरोपियों को गिरफ्तार किया और पूरी कार्रवाई उसी के अनुरूप की।



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