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Chandigarh Meeting | Punjab Beadbi Act Amendment 2026 Committee Discussion


मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मिलते कमेटी के सदस्य।

पंजाब में बेअदबी के मामलों से जुड़े जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर सरकार और श्री अकाल तख्त साहिब के बीच आगे की बातचीत का रास्ता तैयार हो गया है। पंजाब सरकार की ओर से गठित 7 सदस्यीय कोऑर्डिनेशन कमेटी की 6 अक्टूबर को द

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कमेटी एक्ट के विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा करेगी और अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित पैनल के साथ तालमेल के तरीकों पर भी विचार करेगी। सरकार के मुताबिक, चर्चा का उद्देश्य संबंधित पक्षों के सुझावों पर विचार करते हुए कानून की मूल भावना और पवित्रता को बनाए रखना है।

7 सदस्यीय कमेटी में कौन-कौन

पंजाब सरकार ने 16 सितंबर को इस 7 सदस्यीय कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया था। इसमें अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, रिटायर्ड जस्टिस जसपाल सिंह, रिटायर्ड जस्टिस गुरबीर सिंह, रिटायर्ड IPS अधिकारी एवं पूर्व PPSC चेयरमैन जतिंदर सिंह औलख और लॉ ऑफिसर प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हैं।

सरकार ने दोनों कमेटियों के बीच समन्वय के लिए PCS अधिकारी हरजीत सिंह संधू को नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया है।

एक्ट में आजीवन कारावास-भारी जुर्माने का प्रावधान

पंजाब विधानसभा ने अप्रैल 2026 में इस कानून को मंजूरी दी थी। एक्ट में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें आजीवन कारावास और 25 लाख रुपए तक जुर्माना शामिल है। अकाल तख्त साहिब की ओर से एक्ट के कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्तियां और सुझाव दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पहले ही कह चुके हैं कि बेअदबी के मामलों में आजीवन कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान कानून की मूल नींव है और समीक्षा की प्रक्रिया में इसकी मूल भावना से समझौता नहीं होना चाहिए।

अकाल तख्त ने कानून को फिलहाल रोकने को कहा

इधर, 30 सितंबर को तय दो महीने की समयसीमा पूरी होने के बाद श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार से एक्ट को सहमति बनने तक लागू न करने की मांग की है। अकाल तख्त की ओर से कहा गया है कि कानून के विवादित प्रावधानों पर व्यापक विचार-विमर्श और आम सहमति के बाद ही आगे बढ़ा जाए।

अब 6 अक्टूबर की बैठक में सरकार की 7 सदस्य कमेटी अकाल तख्त से मिले सुझावों और एक्ट के प्रावधानों पर चर्चा करेगी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर रास्ता तय किया जाएगा।



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