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पंजाब-हिमाचल सीमा पर स्थित माजरा कूड़ा प्लांट को लेकर विरोध लगातार तेज हो रहा है। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड पर पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के मामले में 6.10 लाख रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है। बोर्ड ने 29 सितंबर, 2026 को कंपनी को 7 दिन के भीतर यह राशि जमा कराने के निर्देश दिए थे। बोर्ड की जांच में प्लांट से जुड़े कुछ प्रदूषण मानक निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। इसके बाद कंपनी के खिलाफ मुआवजे की कार्रवाई की गई। हालांकि, स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों ने इसे समस्या का स्थायी समाधान मानने से इनकार किया है। पंजाब मोर्चा के कन्वीनर कुमार गौरव राणा ने कहा कि प्लांट को लेकर मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में भी विचाराधीन है। उनका कहना है कि केवल पर्यावरणीय मुआवजा लगाने से लोगों की समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रदर्शनकारियों की मांग प्लांट को बंद करवाने की है। प्लांट के संचालन को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं राणा ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायतों और विरोध के बावजूद प्लांट के संचालन को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। उनका कहना है कि पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की स्थिति में सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी माजरा संघर्ष कमेटी ने भी आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। कमेटी के अनुसार, सोमवार को सोलन के उपायुक्त से मुलाकात कर प्लांट बंद करवाने की मांग रखी जाएगी। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर पंजाब-हिमाचल सीमा पर विरोध प्रदर्शन को और व्यापक करने की चेतावनी दी गई है।
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माजरा कूड़ा प्लांट पर 6.10 लाख का जुर्माना:हिमाचल प्रदूषण बोर्ड का बड़ा एक्शन; प्रदर्शनकारी बोले-सरकार को प्लांट बंद करना चाहिए
