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पेपर लीक मामले में सीआईडी की बड़ी कार्रवाई:सीजीएल – बोकारो में 30 अभ्यर्थियों को पेपर रटवाने वाला एजेंट रितेश गिरफ्तार




जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में धांधली मामले में सीआईडी ने गुरुवार को फिर बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने पेपर लीक करने वाले सिंडिकेट के एक अहम एजेंट रितेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। वह परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आईसीएन टेक्नोलॉजी के फरार संचालक मिथिलेश सिंह का करीबी रिश्तेदार है। सीआईडी ने उसे पूछताछ के लिए रांची बुलाया था। यहां कई घंटे पूछताछ करने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी अब उसे रिमांड पर लेने की तैयारी में है, ताकि मिथिलेश सिंह तक पहुंच सके। रितेश बिहार के भोजपुर जिले का रहने वाला है, लेकिन लंबे समय से बोकारो के दुग्धा में रह रहा था। जांच में पता चला कि रितेश ने सीजीएल परीक्षा के 30 से ज्यादा अभ्यर्थियों को दुग्धा में एक गोपनीय ठिकाने पर जुटाया था। परीक्षा से पहले इन अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब रटवाया था। रट्‌टामार गिरोह की मदद से परीक्षा देने वाले अधिकतर अभ्यर्थी सफल भी हो गए। इसके बदले रितेश ने करोड़ों रुपए मिथिलेश सिंह तक पहुंचाया। अभय ने कहा था- आईसीएन के 2 कर्मियों ने लीक किए थे पेपर सीआईडी की जांच में पता चला है कि सीजीएल परीक्षा के संचालन का जिम्मा वेबेल टेक्नोलॉजी के पास था। बाद में वेबेल ने प्रश्न पत्र छपवाने का काम आईसीएन टेक्नोलॉजी को सौंपा। फिर आईसीएन के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश व राहुल कुमार ने पेपर लीक करने में अहम भूमिका निभाई। इन दोनों को सीआईडी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इन्हें तीन बार रिमांड पर लेकर सीआईडी पूछताछ कर चुकी है कि उन्होंने पेपर किन-किन लोगों तक पहुंचाया। इससे पहले मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने सीआईडी को बताया था कि आईसीएन के इन्हीं दो कर्मचारियों ने पेपर लीक किए। यही पेपर रितेश को भी मिला। इसी प्रश्न पत्र के आधार पर रितेश ने अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब रटवाया। सीआईडी इस गिरफ्तारी को अहम मान रही है। जुलाई के बाद यह 21वीं गिरफ्तारी जुलाई के बाद शुरू हुई जांच के दूसरे चरण में सीआईडी ने 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एजेंसी के कर्मचारियों से लेकर पर्चा रटकर पास होने वाले सरकारी मुलाजिम तक शामिल हैं। 2025 में हुई थी 16 गिरफ्तारी सीआईडी थाना में जनवरी 2025 में केस दर्ज होने व शुरुआती जांच यानी पहले चरण में एजेंसी ने 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनपर आरोप था कि इन आरोपियों ने प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए की ठगी व उगाही की।



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