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पठानकोट-जोगिंदरनगर रेललाइन ब्रॉडगेज के लिए सर्वे पूरा:₹26,638 करोड़ का प्रोजेक्ट, कांगड़ा के पर्यटन को मिलेगी रफ्तार




हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले को ‘पर्यटन राजधानी’ के रूप में विकसित करने की दिशा में पठानकोट-जोगिंदरनगर रेल लाइन का ब्रॉडगेज प्रस्ताव एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। करीब 200 किलोमीटर लंबे इस नैरोगेज रेलखंड को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए रेलवे द्वारा मंजूर किए गए सर्वे और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर काम तेजी से चल रहा है। पेशेवर एजेंसी द्वारा फील्ड सर्वे और ट्रैफिक स्टडी का काम पूरा कर लिया गया है।फिलहाल इस परियोजना की डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसमें इसके तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का गहनता से आकलन किया जा रहा है। करीब ₹26,638 करोड़ की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट को अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। डीपीआर पूरी होने के बाद राज्य सरकार और केंद्रीय वित्त मंत्रालय से इसे औपचारिक अनुमोदन दिया जाएगा।
पर्यटन, व्यापार और रोजगार के लिए साबित होगा गेमचेंजर ब्रॉडगेज लाइन का निर्माण कांगड़ा के पर्यटन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के लिए एक बड़ा कनेक्टिविटी कॉरिडोर बनकर उभरेगा। इससे धर्मशाला, मैक्लोडगंज, पालमपुर और बीड़-बिलिंग जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी। इसका सीधा फायदा स्थानीय होटल, टैक्सी, होम-स्टे और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को मिलेगा। एजेंसी द्वारा किए गए सर्वे में आगामी 20 से 30 वर्षों की यातायात मांग और पर्यटन से जुड़े आंकड़ों का विशेष रूप से अध्ययन किया गया है।

मंडी तक विस्तार का भी प्रस्ताव पठानकोट-जोगिंदरनगर सेक्शन को आगे मंडी तक ले जाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। रेल मंत्रालय ने संसद में दिए अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि जोगिंदरनगर से आगे मंडी तक रेल लाइन के विस्तार का विषय सरकार के समक्ष उठाया गया है। किसानों और कारोबारियों को भी मिलेगा फायदा नैरोगेज के ब्रॉडगेज में बदलने से यात्री सुविधाओं के साथ-साथ माल ढुलाई की क्षमता में कई गुना इजाफा होगा। इससे कांगड़ा की प्रसिद्ध चाय, फल और कृषि-बागवानी उत्पादों को देश की बड़ी मंडियों तक सीधे और सस्ते रेल परिवहन के जरिए पहुंचाना आसान हो जाएगा। 2010-11 में अटक गई थी योजना उल्लेखनीय है कि कांगड़ा में ब्रॉडगेज लाइन की मांग दशकों पुरानी है। वर्ष 2010-11 में हुए पुराने सर्वे में अत्यधिक लागत और कम वित्तीय रिटर्न (ROI) के चलते इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका था। हालांकि, अब नए सर्वे और ट्रैफिक स्टडी का पूरा होना इस परियोजना की ओर एक बड़ा कदम है। डीपीआर तैयार होने के बाद ही रूट अलाइनमेंट, चरणबद्ध निर्माण और बजट की अंतिम तस्वीर साफ हो सकेगी।



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