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Gupt Navratri 2026: Devi Sati Dasa Mahavidya Sadhana & Puja Benefits


5 घंटे पहले

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15 जुलाई (आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा) से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। यह उत्सव 23 जुलाई तक रहेगा। इन दिनों में तंत्र साधना से जुड़े लोग देवी सती की दस महाविद्याओं की कृपा पाने की कामना से विशेष साधनाएं करते हैं।

देवी सती के क्रोध से प्रकट हुई थीं दस महाविद्याएं

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, दस महाविद्याओं का संबंध देवी सती से है। मान्यता है कि देवी सती के क्रोध से दस महाविद्याएं प्रकट हुई थीं। इन महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं।

गुप्त नवरात्रि में इन्हीं दस महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए साधना की जाती है। माना जाता है कि इनकी आराधना से विशेष आध्यात्मिक शक्ति और मन की शांति प्राप्त होती है।

दक्ष यज्ञ से जुड़ी है दस महाविद्याओं के प्रकट होने की कथा

पौराणिक कथा है कि भगवान शिव का विवाह देवी सती से हुआ था। देवी सती के पिता प्रजापति दक्ष भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे। वे कई बार भगवान शिव का अपमान करने का प्रयास करते थे।

एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया। इसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया गया, लेकिन भगवान शिव और देवी सती को निमंत्रण नहीं दिया गया।

जब देवी सती को इस बात की जानकारी मिली, तो उन्होंने भगवान शिव से यज्ञ में जाने की इच्छा जताई। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि प्रजापति दक्ष ने हमें आमंत्रित नहीं किया है, इसलिए हमारे लिए वहां जाना उचित नहीं होगा।

भगवान शिव के समझाने के बाद भी देवी सती अपने पिता के घर जाने की जिद पर अड़ी रहीं। उन्होंने कहा कि पिता के घर जाने के लिए संतान को निमंत्रण की जरूरत नहीं होती।

बार-बार निवेदन करने के बाद भी भगवान शिव ने सहमति नहीं जताई, तो देवी सती क्रोधित हो गईं। मान्यता है कि इसी क्रोध से दस महाविद्याएं प्रकट हुईं। देवी सती का यह रूप देखकर भगवान शिव ने उन्हें यज्ञ में जाने से नहीं रोका।

इसके बाद देवी सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पहुंचीं। वहां प्रजापति दक्ष ने देवी सती के सामने ही भगवान शिव का अपमान करना शुरू कर दिया। पति का अपमान सहन नहीं कर पाने के कारण देवी सती ने यज्ञ कुंड में प्रवेश कर अपनी देह का त्याग कर दिया।

साधना में नियमों का पालन जरूरी

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना विशेष नियमों के साथ करनी चाहिए। साधना में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इसलिए ऐसी साधनाएं तंत्र विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में करना उचित माना जाता है।

इन दिनों में सामान्य भक्तों के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करने, सूर्यदेव को अर्घ्य देने और घर के मंदिर में पूजा करने का महत्व बताया गया है। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से करने के बाद देवी मां की पूजा करनी चाहिए।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के समय मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है। गर्मी कम होने लगती है और बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। इस दौरान खान-पान में सावधानी रखना जरूरी है। बारिश के मौसम में पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है, इसलिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए। अधिक तला-भुना या ऐसा भोजन करने से बचना चाहिए, जिससे गैस और अपच जैसी समस्या हो सकती है।

ध्यान और मंत्र जप से दूर होता है तनाव

गुप्त नवरात्रि में ध्यान करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि ध्यान से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार और तनाव दूर होते हैं।

ध्यान के लिए घर के मंदिर में देवी पूजा करने के बाद शांत स्थान पर आसन लगाकर बैठ सकते हैं। आंखें बंद करके देवी मां का स्मरण करें और अपना ध्यान दोनों आंखों के बीच स्थित आज्ञा चक्र पर केंद्रित करें। इस दौरान सामान्य गति से सांस लेते हुए दुं दुर्गायै नम: मंत्र का जप किया जा सकता है।

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