ग्रामीण खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधा देने के लिए जिले के प्रखंडों में लाखों रुपये खर्च कर खेल मैदान और स्टेडियम विकसित किए गए। कहीं करीब 83 लाख तो कहीं 84 लाख रुपए की लागत से मैदान तैयार किए गए, लेकिन निर्माण के बाद इनकी देखरेख और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह है कि जहां बच्चों को नियमित अभ्यास करना था, वहां कंकर-पत्थर, कीचड़, घास-फूस और कचरा नजर आ रहा है। कई मैदान खेलने लायक नहीं बचे हैं। कुछ ऐसे मैदान हैं जहां राशि खर्च से पहले हालत बेहतर थी। खुले मैदान में बच्चे खेल लेते थे। अब चहारदीवारी से घिरे मैदान में सन्नाटा है। जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कई खिलाड़ी जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। इसके बावजूद मैदानों की यह स्थिति बताती है कि योजनाओं में निर्माण पर तो जोर दिया गया, लेकिन रखरखाव और उपयोग की व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया गया। पहले बच्चे इन्हीं खुले मैदानों में खेलते थे, अब लाखों रुपये खर्च होने के बाद कई मैदान खेलने योग्य नहीं बचे।ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच के साथ मैदानों की नियमित सफाई, रखरखाव, मरम्मत और खेल गतिविधियों की निगरानी की स्थायी व्यवस्था की आवश्यकता है। कोलेबिरा : चहारदीवारी टूटी, ड्रेसिंग रूम बदहाल कोलेबिरा के एसएस प्लस टू हाई स्कूल स्टेडियम की स्थिति भी चिंताजनक है। मैदान के समतलीकरण और नाली निर्माण समेत अन्य कार्यों के बावजूद खेल गतिविधियों के लिए मैदान व्यवस्थित नहीं है। कार्यक्रमों के दौरान चारदीवारी तोड़कर रास्ता बनाया जाता है और बाद में उसे ठीक नहीं कराया जाता। खिलाड़ियों के लिए बने ड्रेसिंग रूम में न खिड़की है, न दरवाजा और न ही बाथरूम की सुविधा। कुरडेग : जतरा के बाद कचरे से पटा माइकल किंडो स्टेडियम कुरडेग का माइकल किंडो स्टेडियम भी रखरखाव के अभाव में बदहाल है। जतरा मेला खत्म होने के बाद परिसर में प्लास्टिक और अन्य कचरा बिखरा पड़ा है। मुख्य गेट जर्जर है और वर्षों पुरानी दर्शक दीर्घा भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। इस वर्ष विधायक मद से चबूतरे पर शेड बनाया गया, जिससे सुविधा की उम्मीद जगी थी, लेकिन सफाई नहीं होने से मैदान की स्थिति जस की तस है। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रशासन हर वर्ष इसी स्टेडियम में जतरा मेला के लिए टेंडर करता है। मेला समाप्त होने के बाद मैदान की नियमित सफाई नहीं होने से खिलाड़ियों के लिए इसका इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है। पीएम श्री एसएस प्लस टू हाई स्कूल जलडेगा के खेल मैदान को करीब 83 लाख रुपए से स्टेडियम की तर्ज पर विकसित किया गया। गैलरी और चारदीवारी तो बना दी गई, लेकिन मैदान समतल और खेल योग्य नहीं हो सका। जगह-जगह कंकर-पत्थर पड़े हैं और बारिश में मैदान कीचड़ में बदल जाता है। घास उगाने के लिए बीज डाले गए, लेकिन घास नहीं उगी। बाद में लगाए गए घास के पौधे भी पानी और रखरखाव के अभाव में सूख गए। निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल पहली बरसात में ही उठ गया था। 19 जून 2025 को गैलरी का एक हिस्सा टूट गया था। उपायुक्त के निर्देश पर जांच के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से को जेसीबी से तोड़कर दोबारा बनाया गया था। केरसई : 84 लाख के बाद भी अधूरा मैदान केरसई स्कूल मैदान में करीब 84 लाख रुपए की लागत से खेल मैदान विकसित किया गया, लेकिन दो साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। मैदान कई जगह ऊबड़-खाबड़ है और घास-फूस उग आई है। चेंजिंग रूम भी टूट-फूट की स्थिति में है। बोरवेल होने के बावजूद उसका समुचित उपयोग नहीं हो रहा। अब तक तो चापाकल भी नहीं लगा ।स्थानीय लोगों के अनुसार मैदान को अब तक विधिवत हैंडओवर भी नहीं किया गया है।
Source link
लाखों खर्च कर नहीं बना खेल मैदान प्रैक्टिस के लिए भटक रहे हैं खिलाड़ी
