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चर्चित युवा होटल कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता अशोक सिंह राघव का बीमारी का ड्रामा बेनकाब हो गया है। जेल से बाहर रहकर अस्पताल में वक्त काटने की उसकी कोशिश नाकाम हो गई। सरायकेला मंडल कारा में बंद राघव को जेल डॉक्टर ने बीमार बताकर पहले सदर अस्पताल और फिर वहां से जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर कराया था। एमजीएम के सीनियर डॉक्टरों की मेडिकल जांच में राघव पूरी तरह स्वस्थ निकला। डॉक्टरों ने उसे भर्ती रखने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद उसे वापस सरायकेला जेल भेज दिया गया। फर्जी रेफरल पर डीसी सख्त, 3 सदस्यीय टीम करेगी जांच बिना किसी बीमारी के कैदी को रेफर करने के इस खेल पर सरायकेला- खरसावां के डीसी नीतीश कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित कर दी है। टीम को 5 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। 12 सितंबर को रचा गया था खेल : जेल डॉक्टर ने 12 सितंबर को राघव को सरायकेला सदर अस्पताल रेफर किया। वहां मेडिकल बोर्ड ने बेहतर इलाज का बहाना बनाकर उसे सीधे एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर भेज दिया। जेल डॉक्टर व मेडिकल बोर्ड के फैसले की होगी स्क्रूटनी जांच के दायरे में डॉक्टर और कर्मचारी : जांच टीम यह पड़ताल करेगी कि जब राघव को कोई गंभीर बीमारी थी ही नहीं, तो उसे किन नियमों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बाहर भेजा गया। दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कड़ी कानूनी व विभागीय कार्रवाई तय है। बिना बीमारी के कैदी राघव को अस्पताल भेजने के मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम बनाई गई है। टीम 5 दिन में रिपोर्ट देगी। दोषी मिलने वाले चिकित्सकों व कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -नीतीश कुमार सिंह, डीसी, सरायकेला-खरसावां
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निखार सबलोक मर्डर के मुख्य साजिशकर्ता की खुली पोल:अस्पताल में ऐश काटने की फिराक में था शूटर जांच में निकला तंदुरुस्त; वापस भेजा जेल
