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राजस्थान में एक तरफ कम बारिश से कई जिलों में सूखे जैसे हालात हैं, दूसरी तरफ जनता के हिस्से का फ्री पानी चोरी करके बेचा जा रहा है। जयपुर में टैंकर माफिया चोरी-छिपे बीसलपुर का मीठा पानी 300 से 400 रुपए में बिल्डिंग और दूसरे कंस्ट्रशन से जुड़े कामों के लिए बेच रहे हैं। ये सच सामने लाने के लिए भास्कर ने जयपुर में 15 दिन ‘ऑपरेशन पानी-चोर’ चलाया। रिपोर्टर ने जयपुर के 3 प्रमुख पॉइंट पर 3 तरीके से इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मालवीयनगर : बिल्डर बनकर बात की 400 रुपए रेट रिपोर्टर जयपुर के मालवीयनगर में एक पाइंट पर पहुंचे। वहां 3 टैंकर थे। वहां मौजूद युवक को रिपोर्टर ने बताया कि वह बिल्डर है और साइट पर पानी का टैंकर चाहिए। पानी बीसलपुर का ही होना चाहिए। उसमें फ्लोराइड नहीं होता, जिससे दीवारें खराब नहीं होती। उसने पहले 400 रुपए मांगे, फिर 350 में बात फाइनल की। उसने ठेकेदार हनुमान के मोबाइल नंबर दिए। रिपोर्टर ने हनुमान को कॉल किया ओर बताया कि दो महीने टैंकर चाहिए। उसने कहा-मीठा पानी ही देंगे। रेट्स भी सही लगा देंगे। GPS लगाया तो सामने आ गया पानी चोरी का सच पानी चोरी का सच जानने के लिए रिपोर्टर ने मालवीयनगर में एक पानी के टैंकर पर GPS लगाया। GPS की मॉनिटरिंग से पता चला कि टैंकर ने एक दिन में करीब 17 किलोमीटर का सफर किया, इसका मतलब है कि कम से कम 8-10 टैंकर की सप्लाई। जबकि रिकॉर्ड के अनुसार, एक टैंकर दिन में सामान्यत तक 5 से 10 किमी कवर करता है। यहां विभाग ने तीन टैंकर लगा रखे हैं। सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक ये 3 टैंकर 12-15 बार सप्लाई करते हैं। पता चलते ही बदल दिया टैंकर : एक दिन बाद टैंकर माफिया की नजर GPS पर पड़ गई। उन लोगों ने GPS हटा दिया और टैंकर भी बदल गया। पहले नीले रंग का टैंकर था, जिसे बदलकर हरा रंग का लगा दिया। ट्रांसपोर्ट नगर : रिकॉर्ड में 113, हकीकत में 180 टैंकर ट्रांसपोर्टनगर में 3 पॉइंट बने हुए हैं। पानी भरने के लिए टैंकरों की लाइन लगी थी। यहां से हमने पानी लेकर निकले बिना नंबरी टैंकर का पीछा किया। टैंकर जवाहरनगर में एक अपार्टमेंट में पहुंचा। रिपोर्टर ने टैंकर ड्राइवर को बताया कि पीजी चलाते हैं। बीसलपुर का मीठा पानी चाहिए। ड्राइवर ने कहा- 300 रुपए लगेंगे। इस अपार्टमेंट में पूछ लो, रोज 2 टैंकर डालता हूं। मुझे रोजाना 3 टैंकर ही विभाग से मिलते हैं। अपार्टमेंट में पानी डलवा रहे एक बुजुर्ग पानी की बोतल लेकर आए और बोले- लाइन में ऐसा बदबूदार पानी आता है। मजबूरी में रोज 2 टैंकर मंगाने पड़ते हैं। अपार्टमेंट में 12 परिवार हैं। सच सामने लाने के लिए रिपोर्टर ने दिनभर गिने टैंकर ट्रांसपोर्ट नगर में 3 पॉइंट पर सुबह 8 से शाम 4 बजे तक पानी भरने के लिए टैंकरों की लाइन लगी रहती है। रिकॉर्ड के अनुसार, 20 से 26 सितम्बर तक 796 पानी के टैंकर भेजे गए थे, यानी हर दिन करीब 100 टैंकर। रिपोर्टर ने एक दिन सुबह से शाम तक पानी भर रहे टैंकरों की काउंटिंग की। एक टैंकर भरने में 5-6 मिनट लग रहे थे। यानी एक घंटे में 8 से 10 टैंकर और 3 पॉइंट पर 1 घंटे में 24 से 30 टैंकर। दिन के 6 घंटे में 180 तक टैंकर, जबकि विभागीय रिकॉर्ड में ये आंकड़ा 100 से 113 ही है। खो-नागोरियान: कर्मचारी बोला- पानी फ्री, टैंकर मालिक बेच रहे रिपोर्टर खो-नागोरियान में बने बीसलपुर के बूस्टर पंप हाउस पर पहुंचे। एक कर्मचारी से कहा- टैंकर चाहिए, भागवत करानी है। उसने कहा- टैंकर फ्री मिल जाएगा। बीसलपुर के पानी के पैसे नहीं लेते हैं। रिपोर्टर ने कहा- थोड़े पानी का मिट्टी पर छिड़काव कराना है तो उसने साफ मना कर दिया। बोला-पीने का पानी है ऐसे बेकार नहीं करेंगे। किसी ने वीडियो बना लिया तो परेशानी हो जाएगी। एक्सईन के नंबर ले लो वो भिजवा देंगे। दूसरे दिन रिपोर्टर खोनागोरियान पाइंट पर पहुंचा। पानी लेकर वहां से निकल रहे टैंकर RJ25-b4676 नंबर का पीछा किया। टैंकर वहां से निकलकर करीम नगर से आगे एक कॉलोनी में गया। वहां एक घर में पाइप लगा दिया। कुछ महिलाएं-बच्चियां डिब्बों में पानी भर कर ले जाने लगी। टैंकर ड्राइवर से रिपोर्टर ने बिल्डर बनकर बात की। उसने टैंकर के 400 रुपए मांगे। रिपोर्टर ने कहा- पानी बीसलपुर का ही चाहिए। नॉर्मल पानी से दीवारों का प्लास्टर खराब हो जाता है। रिपोर्टर ने 350 रुपए देने की बात कही और बताया कि 3 महीने काम चलेगा। इस पर वह 350 रुपए में राजी हो गया। रोज टैंकर डलवाने के बाद रुपए देने की बात कहीं। हकीकत : रिकॉर्ड में 60, असलियत में हर दिन 90 टैंकर सप्लाई रिपोर्टर ने 20 से 26 सितंबर का विभाग का रिकॉर्ड खंगाला। इन 7 दिन में 439 टैंकर सप्लाई हुए थे, यानी रोज करीब 60, जबकि हकीकत में 90 से ज्यादा टैंकर जा रहे हैं। इस पानी चोरी का खुलासा हुआ फ्लो मीटर से। दरअसल, पानी चोरी रोकने के लिए एजेंसी ने सॉफ्टवेयर बनाकर फ्लो मीटर लगाए थे। फ्लो मीटर का वॉल्व खोलने पर एक बार में 4000 लीटर पानी आता है, यानी एक टैंकर। भास्कर ने इस फ्लो मीटर का डेटा चेक किया तो सामने आया कि 7 दिन में यहां से 623 टैंकर भरे गए, यानी हर दिन करीब 90 टैंकर।
बड़ी समस्या : ठेकेदार बदलते रहे, टैंकर ड्राइवर वही जलदाय विभाग में टेंडर के जरिए ठेकेदार तो बदल जाते हैं लेकिन टैंकर ड्राइवर वही रहते हैं। कई ड्राइवर तो 12 से 15 साल से हैं। हालांकि ठेकेदार भी एक से दूसरे जोन में टेंडर ले लेते हैं। भास्कर के पास साउथ और नाॅर्थ जोन के डेढ़ दर्जन ड्राइवरों की लिस्ट है, जो सालों से एक ही जगह टैंकर चला रहे हैं। टैंकर ड्राइवरों की मनमानी इतनी है कि वे अपने हिसाब से ही काम करते हैं। खुद 3 से ज्यादा टैंकर फ्री में लेकर जाते हैं और मुनाफे के लालच में फ्री के पानी को बेचते हैं। पानी चोरी की सजा : ड्राइवर ब्लैकलिस्ट, टेंडर कैंसिल जलदाय विभाग के एडीशनल चीफ इंजीनियर अजयसिंह राठाैड़ ने बताया कि पानी बेचने की शिकायत सही पाई जाती है तो पेनल्टी लगाकर ब्लैकलिस्ट करके ड्राइवर को हटा देते हैं। लगातार शिकायतें आने पर ठेकेदार का टेंडर भी कैंसिल कर देते हैं। कानून की बात करें तो पानी चोरी के मामले में 379 की धारा में मुकदमा होता है। बिना परमिशन लाइन में छेद करके पानी चोरी करने पर लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम में एक्शन होता है। वहीं पुलिस शुरुआत में 151 में भी गिरफ्तार करती है। राजस्थान में जयपुर और कई जिलों में कार्रवाई की गई है। जहां भी समस्या, भेज देते हैं बीसलपुर का पानी जयपुर में जहां पर पानी की समस्या होती है वहां पर टैंकरों से बीसलपुर का पानी भेजा जाता है। जयपुर में हाईड्रेंट पाइंट बने हुए है। वहीं से पानी टैंकर में ले जाते है। इसका कोई चार्ज नहीं वसूला जाता है। सरकार टैंकर को तय रेट और दूरी के हिसाब से रुपए देती है। अगर आप भी ऐसे करप्शन के बारे में जानते हैं तो हमारी IRT टीम को 8769882560 पर सूचना दें…
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जयपुर में फ्री पानी चुराकर बेच रहे माफिया:रिपोर्टर ने टैंकर का पीछा किया, GPS लगाया, घंटों गिनती की: दोगुने टैंकर मिले, कीमत 400 रुपए
