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बलौदाबाजार जिले के पलारी नगर में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष यशवर्धन मोनू वर्मा और उनकी धर्मपत्नी ने पूजा-अर्चना कर रथयात्रा की शुरुआत की। पंडित अशोक महाराज ने श्रद्धालुओं को गजा-मूंग का प्रसाद वितरित किया। रथयात्रा बाजार चौक से शुरू होकर गांधी चौक, ठाकुर देव चौक, महामाया चौक, आजाद चौक, शांति नगर, बस स्टैंड, रायपुर रोड, बलौदा बाजार रोड, बघेल कॉलोनी और बाल समुद्र रोड से होते हुए वापस बाजार चौक पहुंची। पूरे रास्ते रामधुन, डीजे और “जय जगन्नाथ” के जयकारों से माहौल भक्तिमय रहा। बारिश भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं का उत्साह रथयात्रा के दौरान हल्की बारिश होती रही, लेकिन भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। महिलाएं, पुरुष और बच्चे घरों से बाहर निकलकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन करते रहे। नीम की लकड़ी से बनी हैं भगवान की प्रतिमाएं इस रथयात्रा की खास बात यह है कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं पत्थर या धातु की नहीं, बल्कि नीम की लकड़ी से बनी होती हैं। इन्हें अधूरा स्वरूप माना जाता है, जो इस परंपरा की विशेष पहचान है। पुलिस ने संभाली सुरक्षा और यातायात व्यवस्था रथयात्रा के दौरान सुरक्षा के लिए पलारी थाना पुलिस तैनात रही। सब-इंस्पेक्टर रागनी राय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था भी संभाली। बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु रथयात्रा में यशवर्धन मोनू वर्मा, तुका राम वर्मा, देवेंद्र वर्मा, नरसिंह वर्मा, नेतरंजन निर्मलकर, भूषण ठेठवार, हरिशंकर, उमेश वर्मा, सुरेश, कुलेश्वर, रमेश सवारा, अनिल, रवि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने “जय जगन्नाथ” के जयकारे लगाए और प्रसाद ग्रहण किया। क्या है रथयात्रा का महत्व? भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा भारत के सबसे प्राचीन और प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर जाते हैं। पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तरह पलारी में भी यह आयोजन हर साल श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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पलारी में निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा:बारिश भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं का उत्साह; पुलिस ने संभाली सुरक्षा और यातायात व्यवस्था
