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शराब की वजह से घरेलू विवाद और महिलाओं की सुरक्षा प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए आदिवासी महिलाओं ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई-सारंगपुर क्षेत्र में शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार दोपहर 1 बजे से शुरू हुआ धरना बुधवार सुबह तक करीब 20 घंटे से जारी है। करीब 50-60 महिलाएं शराब दुकान के सामने सड़क पर ही रातभर बैठी रहीं। महिलाओं की मांग है कि दुकान तत्काल हटाई जाए, जबकि प्रशासन का कहना है कि दुकान मौजूदा नियमों के तहत संचालित है और स्थान परिवर्तन 1 अप्रैल से पहले नहीं किया जा सकता। महिलाएं पिछले एक महीने से दुकान हटाने की मांग कर रही हैं। मांग पूरी नहीं होने पर मंगलवार को कांग्रेस नेत्री सुरेखा शाह और पूर्व जिला अध्यक्ष पुष्पराज सिंह पटेल के साथ महिलाएं दुकान के बाहर पहुंचीं और धरना शुरू कर दिया। इस दौरान भाजपा और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। रातभर सड़क पर बैठीं महिलाएं, पर्यटकों को परेशानी महिलाओं ने रात में दुकान के सामने ही खाना खाया और सड़क पर बैठकर रात बिताई। उनकी सुरक्षा के लिए आसपास के कुछ ग्रामीण पुरुष भी मौके पर मौजूद रहे। सड़क पर धरना होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ पर्यटकों को वाहन से उतरकर पैदल आगे जाना पड़ रहा है। महिलाओं के समर्थन में पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष पुष्पराज सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बुधवार को और ग्रामीणों से मौके पर पहुंचने की अपील की। महिलाओं ने कहा- बेटियों का निकलना मुश्किल प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप है कि मुख्य मार्ग पर शराब दुकान के आसपास शराब पीने वालों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। उनका कहना है कि स्कूली छात्राओं, युवतियों और महिलाओं को यहां से निकलने में परेशानी होती है। महिलाओं ने छात्राओं पर कमेंट किए जाने का भी आरोप लगाया। एसडीएम डॉ. बबीता राठौर ने महिलाओं से कहा कि 1 अप्रैल से दुकान का स्थान बदल दिया जाएगा। तब तक सुरक्षा के लिए दुकान के पास एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी लगाने का आश्वासन भी दिया गया। हालांकि महिलाएं तत्काल दुकान हटाने की मांग पर अड़ी रहीं। महिलाओं ने बताया- शराब से घरों में बढ़ रहे विवाद कामती, ढाबा, खापा उदोंन, घोंगरी, मंगरिया, सारंगपुर, टेकापार और सियारखेड़ा समेत आसपास के गांवों की महिलाएं धरने में शामिल हैं। महिलाओं ने अधिकारियों को बताया कि कई जगह कच्ची शराब की बिक्री बंद होने के बाद लोग ठेके से शराब खरीदकर पी रहे हैं। उनका आरोप है कि युवा और बुजुर्गों के शराब पीने से घरों में विवाद बढ़ रहे हैं और परिवार प्रभावित हो रहे हैं। 21 सितंबर को भी दिया था धरना महिलाएं इससे पहले जिला जनसुनवाई में शराब दुकान हटाने की शिकायत कर चुकी हैं। 21 सितंबर को भी दुकान के सामने सड़क पर बैठकर धरना दिया था। उस समय प्रशासन और आबकारी विभाग ने उन्हें समझाते हुए 1 अप्रैल से दुकान का स्थान बदलने की बात कही थी। इसके बाद महिलाएं वापस गांव चली गई थीं। मंगलवार को कांग्रेस नेताओं के साथ महिलाएं दोबारा दुकान के सामने पहुंचीं और तत्काल शिफ्टिंग की मांग को लेकर धरने पर बैठ गईं। आबकारी विभाग बोला- नियमों के तहत संचालित है दुकान जिला आबकारी अधिकारी डॉ. राजीव द्विवेदी के अनुसार सारंगपुर में शराब दुकान वर्ष 2026-27 के नियमों के तहत संचालित की गई है। इसके लिए जिला समिति की सहमति भी ली गई है। उनका कहना है कि दुकान का स्थान बदलना है तो यह प्रक्रिया अगले आबकारी सत्र में ही संभव होगी। मढ़ई और पचमढ़ी प्रमुख पर्यटन क्षेत्र हैं। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। अधिकारियों के मुताबिक मढ़ई क्षेत्र की शराब दुकान पर ग्राहकी का एक बड़ा हिस्सा पर्यटकों से आता है। सूत्रों के अनुसार दुकान से सरकार को सालाना करीब 10 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। पिपरिया में भी महिलाओं ने शराब के खिलाफ किया प्रदर्शन पिपरिया के पिसुआ गांव में भी मंगलवार को 50 से ज्यादा महिलाओं ने अवैध शराब की बिक्री के विरोध में प्रदर्शन किया। महिलाओं ने अधिकारियों के सामने शराब बंद कराने की मांग रखी और कार्रवाई की अपील की।
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शराब दुकान हटवाने आदिवासी महिलाओं ने सड़क पर बिताई रात:पर्यटन स्थल मढ़ई में 20 घंटे से सड़क पर धरना जारी, प्रशासन बोला- 1 अप्रैल से शिफ्ट होगी
