सागर | वर्धमान कॉलोनी में पावन वर्षायोग चातुर्मास कर रहे मुनिश्री पद्मसागर महाराज ने प्रवचन सभा में सत्याणुव्रत का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं असत्य नहीं बोलता और दूसरों से भी असत्य नहीं बुलवाता, वही सच्चे अर्थों में सत्याणुव्रत का पालन करता है। सत्य ऐसा होना चाहिए, जिससे धर्म और प्राणों की रक्षा हो। मुनिश्री ने मुनिराज और गाय का प्रेरक दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि जंगल में ध्यानस्थ मुनिराज के पास कसाई से बचकर एक गाय पहुंची। पीछे आए कसाई ने गाय के बारे में पूछा तो मुनिराज ने विवेकपूर्ण उत्तर दिया। उन्होंने कहा जो देखता है वह बोलता नहीं और जो बोलता है वह देखता नहीं। मुनिश्री ने बताया कि स्थूल सत्य बोलने से यदि किसी प्राणी की हत्या हो जाए तो ऐसा कथन धर्मसम्मत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि मनुष्य दुनिया में किसी से झूठ बोलकर बच सकता है, लेकिन अपने कर्मों से नहीं। हर जीव को अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ता है।
Source link
सत्य वही जो धर्म व प्राणों की रक्षा करे : पद्मसागर
