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गोरखपुर की रहने वाली अंतर्राष्ट्रीय पहलवान अंशिका यादव ने अपने मेहनत और लगन के दम पर देश का मान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है। हांगकांग में आयोजित इंटरेशनल चैम्पियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर गोल्ड जीता। इसके लिए उन्हें राज्यपाल से भी सम्मानित किया जा चुका है। अंशिका अपने गांव की पहली ऐसी लड़की हैं, जिन्होंने पहलवानी की। उनकी काबिलियत को देखते हुए दूसरी लड़कियां भी प्रेरित हुई। वे भी अब कुश्ती की ट्रेनिंग लेकर उन्हीं की तरह देश के लिए खेलना चाहती हैं। फिलहाल अंशिका JSW की तहत बेंगलुरु रहकर आगे की प्रैक्टिस में जुटी हैं। अंशिका का कहना है कि मैं गांव की लड़की को कुश्ती में आगे बढ़ाना चाहती हूं, ताकि उनकी पहचान तो बने ही साथ ही आत्मरक्षा भी सीख सकें। पांचवी क्लास से खेलना शुरू किया
चौरी चौरा के छोटे से गांव जमौली बाजार की रहने वाली 17 साल की अंशिका ने बताया कि गांव के ही एक स्कूल में पढ़ाई कर रही थी। जब वह पांचवीं क्लास में थीं तो उनके स्कूल में कबड्डी प्रतियोगिता कराई गई थी। जिसमें उन्होंने हिस्सा लिया। उसी दौरान पर एक छोटा सा दंगल कराया गया। उस समय अंशिका को कुश्ती के बारें में कुछ नहीं पता था। फिर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन दिया। उनके खेलने का अंदाज देखकर टीचर्स बहुत खुश हुए। उन्हें लगा कि ये लड़की इस फिल्ड में आगे जा सकती है। गांव के अखाड़ें में लड़ी दंगल
फिर टीचर्स ने अंशिका के पिता से बात की। उस समय पिता यह मानने को तैयार नहीं थे कि एक लड़की को पहलवानी करवाया जाए। फिर उन्हें समझाया गया। पिता ने एक दिन घर से लगभग 3 किलोमीटर दूर बने अखाड़ें में भेजा। जब वे खुद बेटी का प्रदर्शन देखें तब उन्होंने उसे आगे बढ़ाने का मन बना लिया। अंशिका ने उसी अखाड़ें में काफी समय तक प्रैक्टिस किया। कुश्ती में बढ़ती रूचि को देखते हुए पिता ने अंशिका का स्पोर्ट्स कॉलेज में एडमिशन करवा दिया। जहां उन्हें पढ़ाई के साथ- साथ कुश्ती की भी बेहतरीन ट्रेनिंग मिली। कोच के सिखाए गए अनुशासन और अपने लगन से अंशिका पहले लोकल लेवल पर खेली। सीमित संसाधनों के बाजवूद वह आगे बढ़ती गई। धीरे- धीरे स्टेट लेवल पर खेल कर अपनी पहचान बनाई। उसके बाद उन्होंने नेशनल में भी अपना लोहा मनवाया। इतना ही अंशिका ने हांगकांग में आयोजित इंटरनेशनल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हिस्सा लिया और गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया है। राज्यपाल से मिला सम्मान
इसके लिए उन्हें राज्पाल आंनदीबेन पटेल से सम्मानित भी किया जा चुका है। अंशिका अब तक 8 बार नेशनल और एक बार इंटरनेशनल खेल चुकी हैं। फिलहाल वह JSW की स्पॉन्सरशिप के तहत बंगलुरु में रह कर ट्रेनिंग ले रही हैं। 15 से 20 लड़कियों को बढ़ाया आगे
अंशिका ने बताया कि वह गांव की पहली लड़की थी, जिन्होंने पहलवानी की। अब उनको देखकर 15 से 20 लड़कियां भी इस फिल्ड में आगे आ गई हैं और ट्रेनिंग लेकर आगे तक जाने की कोशिश में लगी हुई हैं। अंशिका के पिता मुरलीधर यादव रेलवे में हैं। माता मालती देवी हॉउस वाईफ हैं। चार भाई बहनों में अंशिका सबसे छोटी हैं। बड़ी बहन प्रीति की शादी हो गई है, जबकि दूसरी बहन पूजा की शादी तय है। वहीं भाई जितेंद्र यादव CRPF में जवान हैं। अंशिका यादव बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स की पढ़ाई कर रही हैं। 23 अक्टूबर को सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली हैं। जिसका आयोजन गोरखपुर में ही होगा।
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गांव से निकलकर हांगकांग में जीता गोल्ड:गोरखपुर की इंटरनेशनल रेसलर अंशिका अब देश के लिए तैयार करना चाहती महिला पहलवान
