2 घंटे पहले
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पितृ पक्ष अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर पहुंच गया है। शनिवार 10 अक्टूबर, को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष खत्म होगा। 8, 9 और 10 अक्टूबर, इन अंतिम 3 दिनों में श्राद्ध और तर्पण करने का विशेष महत्व है। आज (8 अक्टूबर) उन मृत लोगों के लिए श्राद्ध करना चाहिए, जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि को हुई थी, कल (9 अक्टूबर) उन मृत लोगों के लिए श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु तिथि चतुर्दशी है और इनके साथ ही इस तिथि पर उन लोगों के लिए भी श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी दुर्घटना में हुई हो। अंतिम दिन यानी 10 तारीख को घर-परिवार के जाने-अनजाने सभी पितरों के लिए श्राद्ध करना चाहिए।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, जो लोग पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करना चाहते हैं, उन्हें सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, धूप-ध्यान, दान-पुण्य करने का संकल्प लेना चाहिए। पितरों के निमित्त सात्विक भोजन तैयार करना चाहिए। घर में धूप-ध्यान करने के बाद जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना चाहिए।
- आज पितृ पक्ष और गुरु प्रदोष का संयोग
आज पितृ पक्ष और गुरु प्रदोष व्रत का संयोग भी है। प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए। पूजा में जलाभिषेक, दीपदान और शिव मंत्र का जप करना चाहिए।
- 9 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध, दुर्घटना में मृत लोगों के लिए धूप-ध्यान करने का दिन
शुक्रवार, 9 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध होगा। पितृ पक्ष में चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस तिथि पर अकाल मृत्यु, दुर्घटना, हत्या, अस्त्र-शस्त्र के कारण या किसी अन्य वजह से असामयिक मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। इस दिन पितरों का स्मरण करते हुए जल में काले तिल, कुशा घास और पुष्प डालकर तर्पण कर सकते हैं। हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को जल चढ़ाना चाहिए। इसे ही तर्पण करना कहते हैं। इसके बाद जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्न का दान भी किया जा सकता है।
- 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा पितृ पक्ष का समापन
शनिवार, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या रहेगी और इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन हो जाएगा। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है, इस साल जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर नहीं हो सका है। इन दिन घर-परिवार के सभी जाने-अनजाने पितरों के लिए धूप-ध्यान किया जाता है। इस दिन कौवे, गाय और कुत्ते को भी खाना खिलाना चाहिए।
अब जानिए श्राद्ध करने के लिए जरूरी चीजें और श्राद्ध करने की विधि…
जरूरी चीजें- गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन। अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है।

- 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू
सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष खत्म हो जाएगा। इसके बाद 11 तारीख से देवी दुर्गा की पूजा का महाउत्सव शारदीय नवरात्रि शुरू होगा। नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है।

