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Himachal CBSE School Teacher Recruitment Delay


हिमाचल सरकार सीबीएसई स्कूलों में टीचरों की नियुक्ति नहीं कर सकी।

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना अब टीचरों की नियुक्ति में देरी के कारण सवालों के घेरे में है। प्रदेश के करीब 150 सरकारी CBSE स्कूलों में तैनाती के लिए लगभग 5,500 टीचर चयनित हैं, लेकिन पांच महीने से ज्यादा

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शैक्षणिक सत्र का लगभग आधा समय बीत चुका है, फिर भी CBSE स्कूलों में स्टूडेंट्स योग्य टीचरों के इंतजार में हैं। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए है कि कुछ बच्चों ने स्कूल छोड़कर दूसरी जगह दाखिला लेना शुरू कर दिया है। फिर भी कांग्रेस सरकार टीचरों की तैनाती नहीं रही।

दरअसल, सुक्खू सरकार ने इसी साल करीब 150 सरकारी स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम शुरू किया था। सरकार की इस पहल की शुरुआत में खूब सराहना हुई। CBSE पाठ्यक्रम शुरू होने के बाद कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ी। अभिभावकों ने सरकारी स्कूलों की ओर रुख किया, लेकिन सरकार इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए क्वालिफाइड टीचर उपलब्ध नहीं करवा पाई, जबकि सरकार ने स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए टीचरों का चयन कर रखा है।

अप्रैल में चयन, मई में मेरिट लिस्ट; फिर भी नियुक्ति अटकी

CBSE स्कूलों के लिए शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया अप्रैल में पूरी हो गई थी। मई में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला ने चयनित शिक्षकों की मेरिट लिस्ट भी सरकार को सौंपी। योजना के मुताबिक मेरिट के आधार पर इन शिक्षकों को CBSE स्कूलों में तैनाती दी जानी थी। इसके बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है।

सरकारी स्तर पर देरी के कारण करीब 5,500 से अधिक चयनित शिक्षक इंतजार में हैं। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 200 प्रिंसिपल और शिक्षकों को ही CBSE स्कूलों में तैनाती मिल पाई है।

चयनित शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट

नियुक्ति में देरी से परेशान चयनित टीचरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका दायर करने वाले वीरेंद्र चौहान ने सरकार से मेरिट के आधार पर जल्द नियुक्ति देने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि जब चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और मेरिट लिस्ट सरकार के पास पहुंच चुकी है तो नियुक्ति में और देरी का कोई औचित्य नहीं है। हाईकोर्ट भी कह चुका है कि मेरिट आधार पर ही टीचरों को नियुक्ति मिलनी चाहिए। अब इस मामले में कल यानी 9 अक्टूबर को भी हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।

सरकार ने करीब 5,700 शिक्षकों के लिए बनाई थी योजना

राज्य सरकार ने नई योजना के तहत करीब 150 सरकारी स्कूलों को CBSE से संबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इन स्कूलों में अध्यापकों की तैनाती के लिए करीब 5,700 टीचर चयनित किए गए। सरकार की योजना थी कि स्क्रीनिंग परीक्षा और मेरिट के आधार पर इन शिक्षकों को CBSE स्कूलों में तैनाती दी जाएगी

शिक्षा मंत्री बोले- मामला CM ऑफिस में

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के मुताबिक CBSE स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय में विचाराधीन है। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर पर ही फैसला होगा।

अब सवाल यही है कि जब नए सत्र में CBSE स्कूलों में बच्चे बढ़े, शिक्षक चयनित हुए और मेरिट लिस्ट भी तैयार हो गई, तो सरकार उन्हें स्कूलों तक पहुंचाने में पांच महीने से ज्यादा समय क्यों ले रही है?



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