आर्यकुलम् इंटरनेशनल स्कूल के बाहर का दृश्य।
करनाल के मुनक स्थित आर्यकुलम् इंटरनेशनल स्कूल में फीस की रकम में करीब 1.75 करोड़ रुपए के गबन, धोखाधड़ी और फीस रसीदों में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। स्कूल के जनरल सेक्रेटरी की शिकायत पर मुनक थाना पुलिस ने अकाउंटेंट, उसकी पत्नी और भाई के खिलाफ क
.
एक अभिभावक की शिकायत से खुला मामला स्कूल के जनरल सेक्रेटरी शिकायतकर्ता कुलदीप ने पुलिस को बीती 25 सितंबर को एक शिकायत दी थी। जिसमें बताया गया कि बीती 20 अगस्त को एक अभिभावक स्कूल आया था। उसने बताया कि अपने दो बच्चों की 11,900 रुपए फीस 11 अगस्त 2026 को अकाउंटेंट दिनेश के बैंक खाते में जमा कराई थी, लेकिन उसे फीस रसीद नहीं मिली। स्कूल के सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड देखने पर दोनों बच्चों की 5,600 और 6,300 रुपए की रसीदें मिलीं, लेकिन दोनों रसीदें 29 जुलाई 2026 की पिछली तारीख में काटी गई थीं। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने वर्ष 2026-27 का पूरा फीस रिकॉर्ड जांचा। शिकायत के अनुसार कई रसीदें पुरानी तारीखों में काटी मिलीं। दिनेश के एसबीआई और एचडीएफसी खातों की स्टेटमेंट देखने पर अभिभावकों द्वारा लंबे समय से फीस की रकम इन खातों में जमा कराने की जानकारी सामने आई। पुलिस जांच में भी करीब चार साल से इस तरह की गतिविधि होने की बात कही गई है।

करनाल मूनक थाना की फोटो।
रसीद रद्द कर दोबारा पुरानी तारीख में काटने का आरोप शिकायत में आरोप लगाया गया कि दिनेश फीस काउंटर पर अभिभावकों को रसीद देने के बाद उसे रद्द कर देता था और स्कूल के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कर उसी रकम की रसीद पिछली तारीख में काटता था। एक अन्य तरीके के तहत आरोप है कि दिनेश दैनिक फीस का मिलान होने के बाद स्कूल से अधिकारियों के चले जाने पर रसीदों की क्रम संख्या में बदलाव किए बिना फीस की रसीदें काटता था।
नकद फीस लेकर फर्जी रसीद देने का आरोप शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ अभिभावकों से नकद फीस लेने के बाद रकम स्कूल में जमा नहीं कराई गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से अगस्त 2026 तक इस तरीके से स्कूल की फीस में दो करोड़ रुपए से अधिक की हेराफेरी, जालसाजी, रसीदों में फर्जीवाड़ा और डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई। हालांकि पुलिस जांच में सीए की अंतरिम ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर 1.75 करोड़ रुपए के गबन की राशि सामने आने की बात कही गई है और अंतिम ऑडिट के बाद रकम की पूरी डिटेल स्पष्ट होने की बात शिकायत में कही गई है।
पत्नी और भाई के खातों में रकम भेजने का आरोप शिकायत में दिनेश की पत्नी साक्षी और भाई रविन्द्र को भी कथित साजिश में शामिल बताया गया है। पुलिस जांच में सामने आया कि 26 दिसंबर 2025 को एक अभिभावक ने बच्चे की 3,150 रुपए फीस साक्षी के खाते में यूपीआई के जरिए जमा की थी। साक्षी के सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक खाते में भी अभिभावकों से फीस की रकम जमा कराने का आरोप है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि दिनेश ने गबन की रकम अपनी पत्नी साक्षी और भाई रविन्द्र के खातों में भेजी। इसी अवधि में दोनों भाइयों द्वारा अलग-अलग मकान बनाए जाने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है। स्कूल प्रबंधन ने आरोप लगाया कि उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन मकानों के निर्माण की रकम को भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

मूनक में स्थित आर्यकुलम् इंटरनेशनल स्कूल का दृश्य।
सीए ऑडिट में 1.75 करोड़ की हेराफेरी बताई मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने सीए फर्म मोंगिया सन्नी एसोसिएट को विशेष ऑडिट के लिए नियुक्त किया। पुलिस जांच रिपोर्ट के अनुसार स्कूल के बैंक खातों, लेखा सॉफ्टवेयर, फीस रसीदों और दिनेश के बैंक खातों की स्टेटमेंट के आधार पर विशेष ऑडिट किया गया। अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार दिनेश के दो बैंक खातों में अभिभावकों से फीस के रूप में कुल 1,18,32,605 रुपए जमा हुए। इनमें से केवल 19,07,537 रुपए स्कूल के खातों में जमा किए गए, जबकि 99,25,068 रुपए के गबन की बात सामने आई। इसके अलावा 76,12,000 रुपए नकद फीस के रूप में प्राप्त करके स्कूल के खातों में जमा नहीं कराने की बात जांच में कही गई। इस तरह कुल करीब 1,75,37,000 रुपए की हेराफेरी सामने आने का उल्लेख पुलिस रिपोर्ट में है। अंतिम ऑडिट के बाद गबन की वास्तविक रकम का पूरा विवरण सामने आने की बात भी कही गई है।
2022-23 में अकेले 8.66 लाख रुपए का आरोप पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सत्र 2022-23 में दिनेश ने 8,66,000 रुपए फीस के रूप में प्राप्त की और बाद में संबंधित रसीदें रद्द कर रकम हड़पने का आरोप है। पुलिस के अनुसार फीस अभिभावकों से लेने, स्कूल में जमा न कराने, पुरानी तारीखों में रसीदें काटने और कुछ फर्जी रसीद तैयार करने की प्रक्रिया में दिनेश, साक्षी और रविन्द्र की कथित मिलीभगत की जांच की जा रही है।
25 सितंबर की शिकायत पर 7 अक्टूबर को केस परिवाद की प्रारंभिक जांच पुलिस चौकी बल्ला के एएसआई धर्मेन्द्र ने की। जांच के लिए डीएसपी से अनुमति ली गई थी। इस दौरान शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा बैंक रिकॉर्ड और सीए फर्म की विशेष ऑडिट रिपोर्ट हासिल की गई। एएसआई धर्मेन्द्र ने बीती 28 सितंबर को अपनी जांच रिपोर्ट थाना मुनक के एसएचओ इंस्पेक्टर शीशपाल सिंह को दी। रिपोर्ट में दिनेश, साक्षी और रविन्द्र के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(4), 318(4), 335, 336(3), 338, 340(2) और 61 के तहत मामला दर्ज कर गहन जांच की आवश्यकता बताई गई।
डीएसपी की मंजूरी के बाद दर्ज हुई एफआईआर थाना मुनक के एसएचआ शीशपाल सिंह ने 28 सितंबर को रिपोर्ट आगे भेजी। असंध के डीएसपी गोरखपाल राणा ने मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दी, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक करनाल की स्वीकृति के आधार पर थाना मुनक में 7 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया गया। अब एफआईआर की जांच एएसआई धर्मेंद्र को सौंपी गई है। पुलिस अब बैंक खातों, फीस रिकॉर्ड, डिजिटल रिकॉर्ड, रसीदों और ऑडिट दस्तावेजों की जांच कर मामले में कथित गबन की वास्तविक रकम और तीनों आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करेगी।
