सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने क्लास 12th के मार्क्स इम्प्रूवमेंट परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया की घोषणा कर दी है। सीबीएसई की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार- अंक सुधार के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया गुरुवार 8 अक्टूबर से शुरू हो गई है। प
.
एजुकेशन एक्सपर्ट्स के अनुसार- सीबीएसई की ओर से इस साल पहली बार आंसर-की का डिजिटली ऑनलाइन मूल्यांकन कराया गया था। इस प्रक्रिया में कुछ कमियां सामने आने के बाद बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स ने री-चेकिंग के लिए आवेदन किया था।
रिजल्ट से असंतुष्ट स्टूडेंट्स की संख्या ज्यादा होने के चलते इस बार इम्प्रूवमेंट परीक्षा में बैठने वाले आवेदकों का आंकड़ा पिछले सालों की तुलना में काफी बढ़ सकता है।

12वीं के मार्क्स इम्प्रूवमेंट परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया की घोषणा कर दी है।
आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा शुल्क
एजुकेशन एक्सपर्ट अमित आहूजा ने बताया कि जो स्टूडेंट इम्प्रूवमेंट के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध ‘प्राइवेट कैंडिडेट लॉगिन’ पोर्टल पर जाना होगा।
स्टूडेंट सभी 5 विषयों में इम्प्रूवमेंट परीक्षा देना चाहता है, तो उसे 1600 रुपए परीक्षा शुल्क देना होगा। एक या एक से ज्यादा सब्जेक्ट के लिए 320 रुपए प्रति सब्जेक्ट के हिसाब से शुल्क तय किया गया है।
बोर्ड नोटिफिकेशन के अनुसार- इन परीक्षार्थियों की परीक्षा फरवरी, मार्च और अप्रैल 2027 में होने वाली मुख्य वार्षिक बोर्ड परीक्षाओं के साथ ही आयोजित की जाएगी।
IIT-NIT में 75% अंकों की पात्रता का नियम तय
अमित आहूजा ने बताया कि हर साल जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड में शामिल होने वाले सर्वाधिक छात्र सीबीएसई बोर्ड से ही होते हैं। कोविड काल के दौरान बोर्ड अंकों की पात्रता में राहत दी गई थी, लेकिन 2023 से इस नियम को फिर अनिवार्य कर दिया गया है।
आईआईटी और एनआईटी में एडमिशन के लिए 12वीं बोर्ड में कम से कम 75 प्रतिशत अंक या संबंधित बोर्ड की टॉप-20 परसेंटाइल की पात्रता होना अनिवार्य है। एक्सपर्ट्स ने स्टूडेंट्स को आगाह करते हुए कहा है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
पिछले साल भी कई छात्र असमंजस और सही समय पर जानकारी न मिलने के कारण इम्प्रूवमेंट आवेदन से चूक गए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि जेईई मेन और एडवांस्ड में बेहतरीन ऑल इंडिया रैंक हासिल करने के बावजूद वे बोर्ड पात्रता पूरी न होने के कारण आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश लेने से वंचित रह गए थे।
