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915ग्राम का हुआ बच्चा,47 दिन इलाज के बाद हुआ स्वस्थ:डॉक्टरों की टीम ने 20 दिन ट्यूब फीडिंग से पोषण दिया, बैग मास्क वेंटिलेशन देकर बचाई जान




सागर जिला अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण मामले में सफलता हासिल करते हुए मात्र 915 ग्राम वजन के नवजात शिशु को नई जिंदगी दी है। जन्म के समय गंभीर स्थिति में रहे इस बच्चे का 47 दिनों तक विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में लगातार इलाज किया गया। बेहतर चिकित्सकीय देखभाल और आधुनिक उपचार के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ और गुरुवार को उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जन्म के साथ ही बिगड़ गई थी हालत रहली विकासखंड के ग्राम पीराहार निवासी लीलाबाई आदिवासी ने 1 जून की रात करीब 11:30 बजे समय से पहले एक बच्चे को जन्म दिया। जन्म के समय नवजात का वजन केवल 915 ग्राम था। बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी और उसकी हृदय गति भी सामान्य से काफी कम थी। स्थिति बेहद नाजुक होने पर उसे तुरंत जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। तत्काल शुरू किया गया जीवनरक्षक उपचार एसएनसीयू प्रभारी डॉ. सौरभ जोशी और उनकी टीम ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत बैग एंड मास्क वेंटिलेशन देकर उसकी जान बचाई। इसके बाद नवजात को सी-पैप (CPAP) मशीन के माध्यम से श्वसन सहायता प्रदान की गई, जिससे उसकी सांसों को स्थिर किया जा सका। 20 दिन तक ट्यूब फीडिंग से मिला पोषण कम वजन और कमजोरी के कारण नवजात सामान्य रूप से दूध नहीं पी पा रहा था। चिकित्सकों ने करीब 20 दिनों तक ट्यूब फीडिंग के जरिए उसे आवश्यक पोषण दिया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर कटोरी और चम्मच की मदद से दूध पिलाना शुरू किया गया। इलाज के दौरान बच्चे में खून की कमी भी पाई गई, जिसके चलते उसे रक्त चढ़ाया गया। संक्रमण से बचाव के लिए दवाइयों के साथ उसकी लगातार निगरानी की गई। कंगारू मदर केयर से मिला बड़ा सहारा चिकित्सकों ने बच्चे के उपचार में कंगारू मदर केयर (Kangaroo Mother Care) पद्धति का भी उपयोग किया। इसके तहत मां और नवजात के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क कराया गया, जिससे बच्चे का तापमान नियंत्रित रहा, स्तनपान में मदद मिली और उसके शारीरिक विकास में तेजी आई। 915 ग्राम से बढ़कर हुआ 1.415 किलोग्राम वजन 47 दिनों तक चले इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्चे के वजन, श्वसन, हृदय गति और अन्य सभी जरूरी स्वास्थ्य मानकों की लगातार निगरानी की। उपचार का सकारात्मक असर दिखा और नवजात का वजन बढ़कर 1.415 किलोग्राम हो गया। सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को स्वस्थ घोषित करते हुए अस्पताल से छुट्टी दे दी। जिला अस्पताल की एसएनसीयू टीम की इस सफलता को गंभीर रूप से कम वजन वाले नवजातों के उपचार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।



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