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Bihar Weather Forecast | Super El Nino Impact on Winter 2026


बिहार सहित देशभर से मानसून अब विदा हो रहा है। धीरे-धीरे तापमान गिर रहा है। हालांकि, कमजोर मानसून के बाद अब सर्दियों पर गहरा संकट मंडरा रहा है। प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा ‘सुपर अल-नीनो’ देश के मौसम चक्र को बिगाड़ सकता है।

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बिहार में इस बार कैसी पड़ेगी ठंडी और उसके पीछे क्या-क्या वजहें हैं, रबी फसलों पर क्या असर पड़ेगा; जानेंगे, बूझे की नाही में…।

सवाल-1ः बिहार में सर्दी का सीजन कब से कब तक रहता है?

जवाबः आमतौर पर बिहार में सर्दी का मौसम नवंबर के आखिरी हफ्ते से शुरू होकर फरवरी के आखिरी हफ्ते तक चलता है। ये वो समय होता है जब तापमान में लगातार गिरावट आती है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होती है और उत्तरी भारत में ठंडी हवाएं तेजी से बहने लगती हैं।

मौसम वैज्ञानिक इसे 3 हिस्सों में बांटते हैं, ताकि तापमान और मौसम के पैटर्न को बेहतर तरीके से समझा जा सके…

1. प्री-विंटर (20 नवंबर-20 दिसंबर)

इस दौरान ठंड की हल्की दस्तक होती है। दिन में हल्की गर्मी और रात में ठंड बढ़ने लगती है।

कोहरा और धुंध की शुरुआत हो जाती है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी शुरू हो जाती है, जिससे मैदानी इलाके जैसे-पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार-झारखंड में ठंडी हवाएं बहने लगती हैं।

तापमान में धीरे-धीरे गिरावट होती है और लोगों की दिनचर्या में गर्म कपड़े शामिल होने लगते हैं।

2. पीक-विंटर (20 दिसंबर-20 जनवरी)

ये सर्दियों का सबसे ठंडा और तीखा दौर होता है। इस समय तापमान बिहार के कई जिलों में 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है और उत्तरी बिहार के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान शून्य के आसपास या उससे भी कम हो सकता है।

पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। ये वही मौसम प्रणाली है, जो पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं व बारिश लाती है।

इस दौरान दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार-झारखंड जैसे राज्यों में ठंड चरम पर होती है। सुबह और रात में कोहरा इतना घना हो सकता है कि विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है।

3. पोस्ट-विंटर (20 जनवरी-20 फरवरी)

इस समय तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, लेकिन ठंडी हवाओं का असर बना रहता है। दिन के समय धूप तेज हो जाती है, पर सुबह और रातें ठंडी रहती हैं।

कई बार इस दौरान भी पश्चिमी विक्षोभ के कारण हल्की बारिश और ठंड की वापसी देखने को मिलती है। यही वो वक्त होता है जब सर्दी से गर्मी की ओर मौसम का ट्रांजिशन शुरू होता है।

सवाल-2ः क्या इस साल कड़ाके की ठंड या शीतलहर महसूस होगी?

जवाबः नहीं। इस बार बिहार-झारखंड और उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड कम पड़़ सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण है- स्ट्रांग सुपर अल-नीनो। 8 अक्टूबर को जारी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट के मुताबिक…

दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान अलनीनो की स्थिति रहने की संभावना 100% है। इसमें ‘वेरी स्ट्रांग अलनीनो’ की आशंका 75% है।

अक्टूबर से दिसंबर के बीच इस अल-नीनो की इंडेक्स वैल्यू +2.5°C या उससे अधिक रहने का अनुमान है, जो इसे 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी अल-नीनो इवेंट बना सकता है। इसका सीधा असर बिहार सहित देशभर के मौसम पर पड़ेगा।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) और निजी मौसम एजेंसी स्काई मेट का अनुमान है कि मैदानी इलाकों में रात और दिन का औसत तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा दर्ज हो सकता है। 15-20 दिसंबर तक वैसी ठंड नहीं होगी, जैसी आमतौर पर होती है।

जब-जब मजबूत अलनीनो, तब-तब सर्दी कम पड़ी…

  • 2015-16: जब अल-नीनो इंडेक्स +2.2 डिग्री सेल्सियस पर था, तब देश में मामूली ठंड पड़ी थी। पटना मौसम विभाग के मुताबिक, बिहार में एक दिन भी कोल्ड डे नहीं पड़ा था। न्यूनतम औसत तापमान करीब 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
  • 2023-24: औसत न्यूनतम तापमान 13.50 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो 1901 के बाद से अब तक का सबसे गर्म विंटर सीजन था।

76 साल में सबसे ज्यादा गर्म समुद्र

  • दुनिया इस समय बेहद ताकतवर अल नीनो का सामना कर रही है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से 3.4°C ज्यादा हो गया है।
  • यह 1950 के बाद का सबसे खतरनाक अल नीनो बताया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ कह रहे हैं। इससे दुनिया के कई हिस्सों में ज्यादा गर्मी, सूखा या भारी बारिश हो सकती है।
  • शिकागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस अल नीनो से जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।

सवाल-3ः …तो क्या इस साल बिहार में बाकी साल से कम दिन ठंड पड़ेगी?

जवाबः ज्यादा संभावना है। IMD के मुताबिक, इस सीजन में बिहार, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी यूपी, पंजाब और हरियाणा में शीतलहर के दिन घटकर आधे रह सकते हैं।

बिहार में 2024 में 10 दिन और 2025 में 15 दिन कोल्ड डे यानी शीतलहर की स्थिति बनी थी। अगर WMO और IMD की रिपोर्ट की मानें तो इस साल यानी दिसंबर से फरवरी तक ज्यादा से ज्यादा 3 से 5 दिन शीतलहर चल सकती है।

स्काई मेट के विज्ञानी महेश पालावत बताते हैं, ‘पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कमजोर पड़ने से पहाड़ों पर बर्फबारी कम होगी और मैदानी इलाकों में सर्दियां गायब रह सकती है।’

पालावत बताते हैं, ‘यदि बीच में कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है, तो केवल 3 से 5 दिनों के लिए तापमान में अचानक तेज गिरावट आ सकती है, लेकिन ऐसा कोई भी दौर लंबे समय तक या एक हफ्ते भी नहीं टिकेगा।’

मतलब कि बिहार सहित देशभर में लंबे समय तक लगातार शीतलहर पड़ने की संभावना कम है।

सवाल-4ः आखिर ये अल-नीनो क्या है और ये सर्दी कैसे बढ़ाता है?

जवाबः अगर आप प्रशांत महासागर का नक्शा देखें, तो इसके पूर्वी छोर पर दक्षिण अमेरिका और पश्चिम की तरफ ऑस्ट्रेलिया और एशियाई देश हैं।

सामान्य दिनों में प्रशांत महासागर के ऊपर से हवा पूर्व से पश्चिम चलती है। ये हवा गर्म सतही पानी को एशिया की तरफ धकेल देती है, जिससे इंडोनेशिया और आसपास के इलाके गर्म रहते हैं, और दक्षिण अमेरिका की तरफ का समुद्र ठंडा।

जब ये हवा कमजोर पड़ जाती है, तो गर्म पानी एशिया से हटकर अमेरिका के पास चला जाता है। इसे कहते हैं EI Niño। इस वक्त भारत में आमतौर पर कम बारिश और ज्यादा गर्मी होती है।

जब हवा बहुत तेज चलने लगती है, तो गर्म पानी पश्चिम की तरफ और ज्यादा धकेल दिया जाता है, और अमेरिका के पास का समुद्र और ठंडा हो जाता है। इसे कहते हैं La Niña। भारत में इस समय आमतौर पर ज्यादा बारिश, ठंडा मौसम और कड़ाके की सर्दी भी देखने को मिलती है।

WMO की रिपोर्ट के मुताबिक, अल-नीनो के दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक 100% बने रहने की संभावना है। दिसंबर के आसपास इसके चरम पर पहुंचने का अनुमान है। इसका मतलब…

मजबूत अल-नीनो के कारण इस बार बिहार में औसत सर्दी सामान्य से कम पड़ने का संकेत है। यानी पूरे सीजन में तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि शीतलहर नहीं आएगी।

जनवरी में कुछ दिनों के लिए कड़ाके की ठंड पड़ सकती है, लेकिन लंबे समय तक लगातार शीतलहर की संभावना कमजोर पड़ सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अल-नीनो जितना मजबूत और लंबे समय तक रहेगा, भारत में सामान्य से कम ठंड पड़ने की संभावना उतनी मजबूत हो सकती है।

सवाल-5ः स्ट्रांग अल-नीनो से रबी फसल भी प्रभावित होगी?

जवाबः बिल्कुल। WMO और अमेरिकी मौसम एजेंसी एनओएए के मुताबिक, अल-नीनो की इंडेक्स वैल्यू +2.5°C या उससे अधिक रहने का सीधा असर रबी फसलों यानी गेहूं, दलहल और तेलहन के पैदावर पर पड़ेगा। बारिश कम होगी।

2015 में अल-नीनो इंडेक्स +2.2 डिग्री सेल्सियस पर था, तब इस सीजन में बारिश सामान्य से 57% कम हुई थी। वहीं, 2023-24 में सर्दियों की बारिश सिर्फ 68% रह गई थी। इससे रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ था।

गेहूं की पैदावार 15% तक घट सकती है…

  • एक्सपर्ट की मानें तो भारत में तापमान अधिक रहने पर गेहूं के पौधे समय से पहले बड़े हो जाएंगे। इससे दाने छोटे और हल्के रह जाएंगे, जिससे कुल पैदावार में 10% से 15% की गिरावट आ सकती है।
  • सरसों पर अधिक तापमान और सूखी हवाओं से सरसों में चेपा कीट का प्रकोप और ‘व्हाइट रस्ट’ (सफेद फंगल बीमारी) का खतरा बढ़ जाएगा।
  • चना व मटर के फूल अत्यधिक गर्मी के कारण समय से पहले गिर सकते हैं।



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