45 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरु हो रही है। वैसे तो शास्त्रों में मां दुर्गा का वाहन सिंह बताया गया है, नवरात्रि के संबंध में मान्यता है कि इस उत्सव में देवी मां अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं। इस साल देवी मां हाथी पर सवार होकर आएंगी।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा कहते हैं, देवी मां के वाहन के संबंध में देवी भागवत में बताया गया है। देवी मां के अलग-अलग वाहनों का असर भी अलग-अलग होता है। देवी भागवत में लिखा है कि- शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता।
वार के अनुसार तय होता है मां दुर्गा का वाहन
इस श्लोक का अर्थ यह है कि अगर सोमवार या रविवार को नवरात्रि की प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होती है, तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार या मंगलवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि शुरू हो, तो माता डोली में बैठकर आती हैं। जब बुधवार से नवरात्रि शुरू होती है, तब माता दुर्गा नाव पर सवार होकर आती हैं।
माता दुर्गा जिस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं, उसके अनुसार सालभर होने वाली घटनाओं का भी आंकलन किया जाता है। देवी भागवत में लिखा है कि- तत्तफलम: गजे च जलदा देवी क्षत्र भंग स्तुरंगमे। नोकायां सर्वसिद्धि स्या ढोलायां मरणंधुवम्।।
मां दुर्गा के वाहन और उनका फल
इस श्लोक में देवी मां के वाहन के अनुसार अलग-अलग फल बताए गए हैं। देवी मां जब हाथी पर सवार होकर आती हैं, तब इसे बहुत शुभ माना जाता है। ऐसी स्थिति में सुख-समृद्धि बढ़ती है और पानी ज्यादा बरसता है। देवी घोड़े पर सवार होकर आती हैं, तो प्राकृतिक आपदा आने का भय रहता है, पड़ोसी देशों से युद्ध की आशंका बढ़ जाती है। देवी नाव पर सवार होकर आती हैं, तो सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जब देवी मां डोली पर आती हैं, तो महामारी होने का भय रहता हैं।
मान्यता है कि माता दुर्गा जिस तरह नवरात्रि की पहली तिथि के वार के अनुसार अलग-अलग वाहन से आती हैं, ठीक उसी तरह वार के अनुसार अलग-अलग वाहनों से अपने धाम लौटती भी हैं। देवी भागवत में लिखा है कि-
शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा।
शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला।।
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा।
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥
इस श्लोक के अनुसार जब नवरात्रि की अंतिम तिथि पर रविवार या सोमवार हो, तब देवी मां भैंसे पर सवार होकर लौटती हैं। ऐसा होने पर देश में रोग और शोक बढ़ता है। शनिवार या मंगलवार नवरात्रि की अंतिम तिथि हो, तो देवी मां मुर्गे की सवारी करती हैं, ऐसा होने पर दुख और कष्ट होने की संभावना होती है। बुधवार या शुक्रवार को देवी हाथी पर जाती हैं, तो बारिश ज्यादा होती है। गुरुवार नवरात्रि खत्म होती है, तब मां दुर्गा मनुष्य की सवारी करती हैं और अपने धाम लौटती हैं, ऐसा होने पर सुख और शांति बनी रहती है।

