पंचकूला शहर में निजी कंपनी से रिटायर्ड एकाउंट्स प्रोफेशनल परवीन कुमार अरोड़ा के साथ ‘एक्सिस सिक्योरिटीज’ के नाम पर 16.20 लाख रुपये की साइबर ठगी अंजाम दी गई है। शातिरों ने उन्हें 1200 प्रतिशत रिटर्न और ब्लॉक ट्रेड स्टॉक ट्रेडिंग का लालच देकर अपना शिका
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पीड़ित परवीन कुमार अरोड़ा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि अप्रैल 2026 में उन्होंने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा था। पूछताछ करने पर उन्हें 21 अप्रैल को “H07-AXIS Elite Insights” नाम के एक वॅाटसऐप ग्रुप में जोड़ दिया गया।
इस ग्रुप में तथाकथित ‘प्रोफेसर’ (जो खुद को एक्सिस सिक्योरिटीज का एमडी/सीईओ प्रणव हरिदासन बता रहा था) शेयर खरीदने और बेचने की सलाह देता था। ग्रुप के अन्य 97 सदस्य (जो वास्तव में ठगों के गिरोह का हिस्सा थे) लगातार प्रोफेसर की तारीफ करते और अपने फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा कर पीड़ित को झांसे में लेते रहे।

अब जानिए, कैसे बिछाया ठगी का जाल…
- आधार-पैन लेकर दिया फर्जी एक्सेप्टेंस लेटर: शातिरों ने परवीन से आधार कार्ड लेकर अनन्या मेहरा नामक महिला के व्हाट्सएप से फर्जी ‘एक्सेप्टेंस लेटर’ भेजा।
- प्ले स्टोर के बाहर से डाउनलोड कराया ऐप: इसके बाद ‘H03- AXIS Customer Support Desk’ ग्रुप बनाकर उन्हें प्ले स्टोर से बाहर का एक संदिग्ध ऐप और वेबसाइट का लिंक दिया गया, जिसके जरिए उनके नाम से फर्जी DMA अकाउंट सेट किया गया।
- विभिन्न बैंक खातों में जमा कराए 16.20 लाख रुपये: 14 मई से 19 जून 2026 के बीच आरोपियों ने राहुल एंटरप्राइजेज, जुनैद एंटरप्राइजेज, ग्लोब एंटरप्राइजेज, सन शाइन चैरिटेबल ट्रस्ट और वीआरपी एंटरप्राइजेज जैसे फर्जी करंट खातों में (फर्जी सेबी सर्टिफिकेट दिखाकर) किश्तों में कुल 16,20,000 रुपये जमा करवा लिए।
- विश्वास जीतने के लिए लौटाए 1.14 लाख रुपये: पीड़ित का विश्वास बनाए रखने के लिए शातिरों ने शुरुआती दिनों में उनके बैंक खाते में 1,14,500 रुपये का रिफंड भेजा। इसके बाद उनकी फर्जी वेबसाइट पर पीड़ित की कुल कैपिटल 30 लाख रुपये दिखाई जाने लगी। शातिरों ने पीड़ित को ‘क्ले क्राफ्ट’ नाम के फर्जी आईपीओ (IPO) में आवेदन करने को कहा और बिना मांगे ही 61,200 शेयर अलॉट होने का दावा करते हुए 76.20 लाख रुपये की मांग कर दी।
46 लाख और मांगे, मना करने पर दी धमकी और ग्रुप से किया ब्लॉक
जब परवीन कुमार ने इतनी बड़ी रकम देने से इनकार कर दिया, तो आरोपियों ने उनकी 30 लाख की पूरी जमा पूंजी जब्त करने और उल्टे मुकदमा ठोकने की धमकी दी। पीड़ित ने जब अतिरिक्त पैसे देने से साफ मना कर दिया, तो उन्हें सभी व्हाट्सएप ग्रुपों से हटाकर नंबर ब्लॉक कर दिए गए। पीड़ित ने जब बीएसई/एनएसई के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की, तो पता चला कि उनके नाम पर कोई वास्तविक शेयर या आईपीओ खरीदा ही नहीं गया था।
