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हर खेत की फसल का ब्योरा जुटाने पर जोर:खेत में कौन-सी फसल, डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा; मौके पर जाकर होगा क्रॉस चेक




खेत में वास्तव में कौन-सी फसल बोई गई है, उसका रकबा कितना है और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी सही है या नहीं, अब इसे क्रॉस चेक किया जाएगा। राज्य सरकार का फोकस सभी खेतों में बोई गई फसल का रिकॉर्ड तैयार करने और उसकी शत-प्रतिशत सर्वे पर है। इसके लिए खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाएगा। साथ ही, सर्वे में दर्ज जानकारी का मौके पर सत्यापन किया जाएगा। गड़बड़ियों का पता लगाने और आंकड़ों की विश्वसनीयता जांचने के लिए राज्य स्तर पर टीम गठित कर अलग-अलग जिलों में फील्ड वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव विकासशील ने शुक्रवार को मंत्रालय में डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन क्षेत्रों में फसल बोई गई है, वहां की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। संबंधित खसरों का सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि जमीन पर फसल लगी है या नहीं। बैठक में प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव रीना बाबा साहब कंगाले, सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सचिव शम्मी आबिदी, संचालक उद्योग प्रभात मलिक, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य फरिया आलम सिद्दीकी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। नक्शों की गड़बड़ी दूर करने तलाशेंगे तकनीकी समाधान बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान सामने आई प्रमुख बाधाओं की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि सर्वे में नक्शे उपलब्ध नहीं होने और दूसरी तकनीकी समस्याओं के कारण काम लंबित न रहे, इसके लिए राजस्व विभाग को समाधान तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह जरूरत के अनुसार नक्शों को अपडेट करने की कार्ययोजना बनाने भी कहा गया। कलेक्टरों के साथ बैठक कर कार्यों की समीक्षा करें
मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को कलेक्टरों के साथ बैठक कर डिजिटल क्राॅप सर्वे की प्रगति और जांच कार्यों की समीक्षा करने को कहा। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के संबंधित अधिकारी गांवों और खेतों के रिकॉर्ड का सत्यापन करें। सर्वे की नियमित निगरानी के साथ विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा किया जाए। कागजी सर्वे से डिजिटल फसल रिकॉर्ड तक 1. राष्ट्रीय पहल का हिस्सा: डिजिटल क्रॉप सर्वे केंद्र सरकार के डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन से जुड़ा है। इसके तहत खेतों और उनमें बोई गई फसलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
2. तकनीक से सटीकता: पारंपरिक सर्वे में मानवीय गलतियों की आशंका रहती है। डिजिटल सर्वे में मोबाइल ऐप और खेत की सीमा की डिजिटल मैपिंग के जरिए फसल संबंधी जानकारी दर्ज की जाती है।
3. किसान पंजीयन में मदद: फसल का सही रिकॉर्ड तैयार होने से किसान पंजीयन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी के सत्यापन में मदद मिल सकती है।
4. खरीदी और मुआवजे में उपयोग: डिजिटल फसल रिकॉर्ड का उपयोग धान खरीदी, फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा से नुकसान के आकलन जैसी प्रक्रियाओं में किया जा सकता है। हालांकि, इन लाभों के लिए रिकॉर्ड की सटीकता और संबंधित योजनाओं के नियम महत्वपूर्ण होंगे।



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