![]()
शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही अंबाला के मंदिरों में भक्तिमय माहौल बन गया है। पहले नवरात्र पर मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु पहुंचने लगे। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। अंबाला शहर स्थित मां अंबिका देवी मंदिर में इस बार विशेष सजावट की गई है। मां के शृंगार के लिए कोलकाता से फूल मंगवाए गए हैं। फूलों से सजे मां के दरबार में माथा टेकने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मां अंबिका देवी मंदिर में नवरात्र को लेकर दो दिन पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। पहले नवरात्र पर श्रद्धालुओं ने मां की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में पहुंचे कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पिछले करीब 40 साल से मां के दरबार में आ रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने मां से जो भी मनोकामना मांगी, वह पूरी हुई। यही वजह है कि नवरात्र के दौरान मंदिर में भक्तों की विशेष आस्था देखने को मिलती है। पहले नवरात्र पर की मां शैलपुत्री की पूजा मंदिर के पुजारी ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं को स्नान के बाद शुद्ध अवस्था में पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले माता की ज्योत जलाकर घट स्थापना की जाती है। इसके बाद खेतरी बोई जाती है और फिर आरती व पूजा-अर्चना की जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पूरे नौ दिन मां के नौ स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा करने की अपील की। मां अंबिका के नाम से पड़ा अंबाला का नाम मां अंबिका देवी मंदिर का धार्मिक महत्व भी खास है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, अंबाला शहर का नाम मां अंबिका देवी के नाम से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि यहां पहले मां का स्थान पिंडी रूप में स्थापित था। बाद में यहां मूर्ति स्थापित कर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। नवरात्र के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। भक्तों की मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां अंबिका जरूर पूरी करती हैं। नवरात्र की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं में खास उत्साह नजर आया। भक्तों ने सुबह उठकर पूजा-अर्चना की और मां के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिरों में अगले नौ दिनों तक धार्मिक आयोजन और पूजा-पाठ का माहौल बना रहेगा।
Source link
मां अंबिका के नाम से जुड़ा अंबाला का इतिहास:नवरात्र पर मंदिर में उमड़ी भीड़, फूलों से हुआ माता का शृंगार
