भास्कर न्यूज | जालंधर 72 साल की बुजुर्ग महिला ने आरटीआई से ली गई जानकारी को अपनी दलीलों के साथ जिला उपभोक्ता आयोग में रखकर केस जीता है। मास्टर गुरबंता सिंह एनक्लेव में एलआईजी फ्लैट आवंटित कर बुनियादी सुविधाएं न देने और अधूरा निर्माण करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग की पीठ ने शिकायतकर्ता सुदर्शन टांगरी (72) की याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता द्वारा जमा करवाई गई कुल राशि 4,54,677 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित, जमा कराने की तारीख से भुगतान तक वापस करे। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में 30,000 रुपये और याचिका खर्च के तौर पर 10,000 रुपये देने के आदेश दिए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी करने को कहा गया है; समय पर भुगतान न करने पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत ब्याज चुकाना होगा। बीबी भानी फ्लैट अलाटी एसोसिएशन के प्रधान दर्शन केस लड़ने में कानूनी सलाह के संबंध में अलाटी का सहयोग कर रहे थे। आरटीआई के जरिए सेवाओं से जुड़ी दलीलों को ताकत देने के लिए आरटीआई को बतौर सबूत पेश किया गया। पीड़िता ने बताया कि बिजली की मुख्य लाइनें और ट्रांसफार्मर वर्षों बाद (2012-2013 में) चालू हो सके। फ्लैट खाली रहे। बुनियादी ढांचा न होने से जमा पूंजी सालों तक फंसी रही, जिससे भारी मानसिक उत्पीड़न हुआ। शिवराज गढ़ निवासी सुदर्शन टांगरी ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उन्होंने 2006 में रेड क्रॉस भवन में आयोजित लकी ड्रॉ के तहत विकास योजना इंद्रपुरम में ब्लॉक-ए, दूसरी मंजिल पर एलआईजी फ्लैट नंबर 78 बुक किया था। उन्होंने किस्तों में कुल 4,54,677 रुपये जमा किए। शिकायतकर्ता का आरोप था कि ट्रस्ट ने सिर्फ कागजी कब्जा दिया। निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ था और फ्लैट रहने लायक नहीं था। कॉलोनी में 45 फीट चौड़ी पहुंच सड़क, पेयजल, बिजली ग्रिड, चालू सीवरेज लाइन और कम्युनिटी हॉल जैसी सुविधाएं नहीं थीं। दोनों पक्षों के सबूतों की समीक्षा के बाद आयोग ने पाया कि ट्रस्ट पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट की धारा 14 के तहत आवश्यक कंप्लीशन सर्टिफिकेट पेश करने में विफल रहा। आयोग ने स्पष्ट किया कि पूर्णता प्रमाण पत्र और बुनियादी सुविधाओं के बिना दिया गया कब्जा अवैध व अधूरा माना जाता है, इसलिए जमा राशि ब्याज सहित लौटाने का फैसला सुनाया गया। जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने आयोग के समक्ष दलील दी कि फ्लैट का कब्जा पहले ही सौंपा जा चुका है और मामला समय-सीमा से बाहर है। फ्लैट्स का आवंटन ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर किया गया था तथा रखरखाव की जिम्मेदारी अलॉटीज की थी।
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72 साल की बुजुर्ग महिला ने आरटीआई को बनाया हथियार, केस जीता
