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जेल में हरि भजन और श्रीमद्भागवत गीता:बंदियों में बदलाव की कोशिश, संत बोले-जीवन में अच्छे कर्म करे




चित्तौड़गढ़ जिला जेल में बंदियों ने हरि भजन किए और संतों से श्रीमद्भागवत गीता का संदेश सुना। संतों ने उन्हें अच्छे कर्म करने, गलत रास्तों से दूर रहने और अपनी सोच बदलने की सीख दी। कार्यक्रम में 100 से ज्यादा बंदियों ने सकारात्मक सोच अपनाने का संकल्प लिया। जेल प्रशासन और इस्कॉन मंदिर की ओर से बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने और उनके जीवन में अच्छे बदलाव लाने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला जेल में हुए कार्यक्रम में जेल प्रशासन की ओर से उपाधीक्षक मुरली मनोहर सुथार, जेलर लोकोज्ज्वल सिंह, देवी सिंह देवड़ा सहित जेल स्टाफ मौजूद रहा। वहीं, इस्कॉन की ओर से संत द्विज राज दास और अक्षय हरिदास ने भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बंदी शामिल हुए और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़े। उपाधीक्षक मुरली मनोहर सुथार ने बताया कि कारागार नियमों में बंदियों के मानसिक और सामाजिक सुधार के लिए कई तरह की कल्याणकारी गतिविधियों का प्रावधान है। इसी के तहत जेल में समय-समय पर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि बंदियों को तनाव से राहत मिले और उनकी सोच में सकारात्मक बदलाव आए। भजन और संगीत से तनाव कम करने की कोशिश कार्यक्रम के दौरान भजन और संगीत का आयोजन किया गया। जेल प्रशासन के अनुसार, जेल में रहने के दौरान कई बार बंदियों को तनाव और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है। ऐसे कार्यक्रम उन्हें मानसिक शांति देने और सकारात्मक सोच अपनाने में मदद करते हैं। प्रशासन ने बताया कि संगीत और आध्यात्मिक गतिविधियों का बंदियों के मन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इससे उनके व्यवहार में सुधार लाने और जीवन को बेहतर दिशा देने के बारे में सोचने का अवसर मिलता है। जेल से बाहर आने के बाद समाज से दोबारा जुड़ने में भी ऐसी गतिविधियां मददगार साबित हो सकती हैं। संतों ने गीता का संदेश देकर अच्छे कर्म करने की सीख दी कार्यक्रम में इस्कॉन के संतों ने बंदियों को श्रीमद्भागवत गीता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इंसान को जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए और गलत रास्तों से दूर रहना चाहिए। संतों ने अध्यात्म, अनुशासन और सदाचार का महत्व भी समझाया। इस दौरान जेल परिसर में हरि भजन हुए, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। बंदियों ने भी कार्यक्रम में रुचि दिखाई और भजनों में भाग लिया। कई बंदियों ने जीवन में अच्छे बदलाव लाने और सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ने की बात कही। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखे जाएंगे, ताकि बंदियों को अपने जीवन में बदलाव लाने का अवसर मिले और वे जेल से बाहर आने के बाद समाज से बेहतर तरीके से जुड़ सकें।



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