चित्तौड़गढ़ के एक निजी हॉस्पिटल में हुए सिजेरियन ऑपरेशन को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। एक महिला के पति ने आरोप लगाया है कि डिलीवरी के दौरान ऑपरेशन करने वाली मेडिकल टीम ने महिला के पेट के अंदर ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाला कपड़ा (मोप) ह
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इसके बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। पहले चित्तौड़गढ़ में इलाज चला, फिर अहमदाबाद के हॉस्पिटल में जांच के दौरान पेट से वही मोप निकाला गया। आरोप है कि इस लापरवाही की वजह से महिला के शरीर में गंभीर संक्रमण फैल गया, बड़ी आंत फट गई, लीवर और तिल्ली पर असर पड़ा। पीड़िता के पति का दावा है कि अब तक करीब 15 लाख रुपए इलाज पर खर्च हो चुके हैं।
मामले की शिकायत जिला प्रशासन और पुलिस तक पहुंचने के बाद जिला कलेक्टर डॉ. मंजू और एसपी धर्मेंद्र सिंह ने शुक्रवार को मेडिकल टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि यदि जांच में डॉक्टरों या हॉस्पिटल प्रशासन की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

आरोप है कि दक्ष हॉस्पिटल की मेडिकल टीम ने ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में मोप छोड़ दिया था।
5 पॉइंट्स में पढ़िए पूरा मामला
- 8 महीने की गर्भावस्था में हुआ सिजेरियन, बेटे का जन्म: चित्तौड़गढ़ निवासी लोकेश चौधरी की पत्नी जया चौधरी गर्भवती थीं। 2 मई को उन्हें कुंभानगर स्थित दक्ष हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टर प्रतिभा सनाढ्य ने जांच के बाद गर्भावस्था में जटिलता बताते हुए तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी। उसी दिन दोपहर में महिला को भर्ती किया गया और करीब 3 बजे ऑपरेशन किया गया। परिवार को बताया गया कि बेटे का जन्म हुआ है और 6 मई को मां-बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
- घर पहुंचने के बाद बिगड़ी महिला की तबीयत, बढ़ता गया संक्रमण: अस्पताल से छुट्टी मिलने के करीब 10 दिन बाद जया के पेट में तेज दर्द और बुखार शुरू हो गया। परिजनों ने पहले स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे महिला की कमजोरी बढ़ने लगी, खाना-पीना बंद हो गया और उल्टियां होने लगीं। 19 मई को उन्हें बिरला हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां जांच में लीवर में सूजन और शरीर में संक्रमण की बात सामने आई।
- अहमदाबाद में पेट से निकला ऑपरेशन में इस्तेमाल हुआ मोप: हालत में सुधार नहीं होने पर परिवार 24 जून को महिला को अहमदाबाद के जायडस अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला के पेट के अंदर ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल होने वाला कॉटन का मोप रह गया था। इसके कारण पेट में फ्लूड जमा होकर बड़ी गांठ बन गई और गंभीर संक्रमण फैल गया। 27 जून को ऑपरेशन कर मोप निकाला गया और बड़ी आंत का भी इलाज किया गया।
- 15 लाख रुपए खर्च, नवजात को नहीं मिल पाया मां का दूध: परिवार का आरोप है कि इस पूरी घटना से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। इलाज में अब तक करीब 15 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के कारण नवजात बच्चे को मां का दूध भी नहीं मिल सका। पति ने ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
- जांच के लिए मेडिकल टीम गठित, रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जिला कलेक्टर डॉ. मंजू और एसपी धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर मेडिकल टीम गठित की गई है। जांच में ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पताल की रिपोर्ट देखी जाएगी। यदि लापरवाही साबित होती है तो संबंधित डॉक्टरों और हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि मामले में दक्ष हॉस्पिटल प्रबंधन को कई बार फोन किए गए, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
