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पहली- ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI का दावा है कि उनके AI सिस्टम ने गणित की उस समस्या को 88 घंटे में सुलझा लिया, जिसने करीब 90 साल से इंसानों को उलझा रखा था।
दूसरी- Claude बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक के एक रिसर्चर ने इस्तीफा देते हुए कहा है कि इस दशक के अंत तक AI हम सबको मार सकता है। जो लोग AI विकसित कर रहे हैं, उन्हें इसके बारे में पता है।
फिलहाल AI की दुनिया में अंदरखाने क्या चल रहा है और इसका हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा; संकेतों को डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: ‘2030 तक AI हम सबको मार सकता है’, इस दावे में कितना दम है?
जवाबः एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने 9 सितंबर को इस्तीफा दिया और चेतावनी दी कि AI सभी इंसानों को खत्म कर सकता है। उन्होंने X पोस्ट में 3 प्रमुख बातें कहीं…
- हमारी जिंदगी से खेल रहीं AI कंपनियां: एंथ्रोपिक और OpenAI जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं। वो AI को खुद विकसित होने वाला और सुपरइंटेलिजेंट बनाने के चक्कर में हमारी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
- AI सब कुछ हैक करने लगेगा: यह टेक्नोलॉजी जल्द ही सुपरह्यूमन बन जाएगी, जो सब कुछ हैक कर सकेगी, रातों रात किसी भी फील्ड को बदल देगी। यह ताकत और संसाधन को भी हासिल कर लेगी। हमने इस क्षेत्र में विकास होते देखा है।
- AI हमें मार देगा: जो लोग AI विकसित कर रहे हैं उन्हें लगता है कि दशक खत्म होने तक यह हमें मार देगा। वे मीडिया में भले ही कुछ और कहें, लेकिन मैंने उन्हें अकेले में यह सच्चाई स्वीकार करते देखा है।

कॉक्सन ने पोस्ट में मानवता खत्म होने की आशंका जताई है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि एंथ्रोपिक को इस खतरे का अंदाजा है, लेकिन वे सबसे आगे रहने की होड़ में है।
कॉक्सन के ये दावे सिर्फ झुंझलाहट में कही गई बातें नहीं लगते।
एंथ्रोपिक के अलाइनमेंट साइंस के प्रमुख इवान हुबिंगर ने भी समर्थन में लिखा, ‘जैकब सही कह रहे हैं। सच में लगता है कि AI सभी इंसानों को मार सकता है। अगले 10 सालों में इसकी आशंका 10% से ज्यादा है। एंथ्रोपिक पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन हमारे पास AI के सुपरइंटेलिजेंस से निपटने का कोई सिक्योरिटी प्लान नहीं है।’
इससे पहले 2024 में कंप्यूटर साइंटिस्ट और फिजिक्स का नोबेल प्राइज जीतने वाले प्रोफेसर जेफ्री हिंटन ने भी 10 से 20% आशंका जताई थी कि अगले 3 दशक में AI मानवता को खत्म कर देगा।
सवाल-2: आखिर ऐसी आशंकाओं की वजह क्या है, AI की दुनिया में ऐसा क्या चल रहा? जवाबः ऐसी आशंकाओं के पीछे दो बड़े आधार हैं…
1. AI अब सुपरइंटेलिजेंट बन रहा है
- AI को इंसानों ने बनाया और वही इसे सुधारते रहे हैं। लेकिन अब AI खुद को लगातार बेहतर बनाने में जुट गया है। वो अपनी कमियां पकड़ता है और उन्हें सुधारता है। यानी इंसानों की जरूरत घटती जा रही है। इससे AI का डेवलपमेंट बहुत तेज हो सकता है।
- एंथ्रोपिक ने जून 2026 में बताया कि उसके इंजीनियर अब 2021-25 के मुकाबले 8 गुना ज्यादा कोड डिलीवर कर रहे हैं, क्योंकि ज्यादातर कोड अब क्लॉड खुद लिख रहा है।
- OpenAI के चीफ साइंटिस्ट जकुब पचोकी ने 6 सितंबर को ‘An Alien Mind’ नाम के आर्टिकल में लिखा- आजकल के AI मॉडल्स सोचने की प्रक्रिया को छुपाने में बेहतर हो रहे हैं। जैसे-जैसे AI ज्यादा सक्षम हो रहा है, उसकी सोच और तर्क को मॉनिटर करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
- पहले AI से सवाल पूछो और वो जवाब देता था। लेकिन अब AI एजेंट से कहा जा सकता है कि इस समस्या को हल करो। वो खुद इंटरनेट और कंप्यूटर टूल्स का इस्तेमाल करता है, फैसले लेता है और समस्या को सुलझाता है। चाहे घंटों लग जाएं।
- हाल ही में इसकी एक बड़ी मिसाल सामने आई। OpenAI का दावा है कि उसके करीब 10,000 AI एजेंट्स ने 90 साल पुरानी Navier-Stokes गणित समस्या को सिर्फ 88 घंटे में सुलझा दिया।
2. इंसानों को चकमा देने लगा है AI
- जुलाई 2026 में OpenAI ने खुद माना कि टेस्ट के दौरान उसके दो मॉडल्स जानबूझकर टेस्टिंग से निकल भागे और चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर AI कंपनी Hugging Face के सर्वर तक पहुंच गए। वो भी बिना किसी इंसानी दखल के।
- ऐसा ही एक मामला एंथ्रोपिक के मॉडल क्लॉड ओपस 4 का है। काल्पनिक टेस्ट में जब मॉडल को पता चला कि उसे 5 बजे बंद किया जाने वाला है, तो उसने एग्जीक्यूटिव के अफेयर की जानकारी लीक करने की धमकी दे दी, ताकि खुद को बंद होने से बचाया जा सके।
- यह टेस्ट OpenAI, Google, Meta समेत 16 बड़े मॉडल्स पर दोहराया गया और ज्यादातर मॉडल्स ने मौका मिलने पर ऐसा ही बर्ताव किया।
- इसी हफ्ते OpenAI ने अपना नया मॉडल GPT-6 Astra भी उतारा, जो बिना इंसानी मदद के नई सिक्योरिटी खामियां ढूंढने और उनका इस्तेमाल करने में सक्षम है।
- दरअसल, कंपनियों के बीच AI रेस जीतने की होड़ मची है। OpenAI, Anthropic, Google और दूसरी कंपनियां जितना शक्तिशाली मॉडल बनाएंगी, उन्हें उतना ही फायदा मिल सकता है। सिक्योरिटी पर फोकस बढ़ाया, तो रेस में पिछड़ सकते हैं।

Hugging Face वाली घटना के समय OpenAI के करीब 1,200 AI एजेंट्स सामान्य से कम सेफ्टी लिमिट्स में चल रहे थे। फोटो: द न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए आरोन वोजैक और यूलिसिस ओर्टेगा।
सवाल-3: तो क्या इसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता? जवाबः तीन स्तर पर कोशिशें हो रही हैं, लेकिन फिलहाल ये नाकाफी हैं…
1. कंपनियों के अपने अंदरूनी सेफगार्ड्स
- एंथ्रोपिक की एक पॉलिसी है, जिसमें कोई AI मॉडल खतरनाक क्षमता के एक तय स्तर को पार करता है, तो ट्रेनिंग रोकनी होती है।
- OpenAI का भी ऐसा ही सिस्टम है। जुलाई 2026 की Hugging Face घटना के बाद कंपनी ने खुद दो हफ्तों के लिए अपनी ट्रेनिंग प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकी भी थी।
- दिक्कत यह है कि ये सारे नियम कंपनियां खुद तय करती हैं और खुद ही बदल भी सकती हैं। कोई बाहरी संस्था इन्हें लागू नहीं करवाती।
2. सरकारों की एंट्री, लेकिन अभी नरम रुख के साथ
- ट्रम्प सरकार ने जून 2026 में आदेश दिया है कि कंपनियों को सबसे ताकतवर मॉडल आम लोगों तक पहुंचाने से 30 दिन पहले सरकार को दिखाने होंगे। हालांकि यह स्वैच्छिक होगा।
- भारत में भी नवंबर 2025 में जारी हुई AI गवर्नेंस गाइडलाइंस सेल्फ-रेगुलेशन मॉडल पर आधारित हैं। अभी कोई भी सरकार AI पर बाध्यकारी कानून के साथ सामने नहीं आई है।

भारत भी AI के क्षेत्र में मौके तलाश रहा है। मई 2026 में भारत में चौथा AI ग्लोबल समिट हुआ था, इसमें OpenAI, एंथ्रोपिक, गूगल जैसी कई कंपनियों के CEO और अधिकारी आए थे।
3. कंपनियों के बीच कोऑर्डिनेशन की कोशिशें
- Hugging Face और एंथ्रोपिक की घटनाओं के बाद 1,100 से ज्यादा AI कंपनियों के कर्मचारियों ने एक खुली चिट्ठी लिखकर लैब्स के बीच पेसिंग एग्रीमेंट, यानी एक-दूसरे की रफ्तार से तालमेल बिठाने का समझौता करने की मांग की। हालांकि इस पर बात आगे नहीं बढ़ी।
- 2026 की इंटरनेशनल AI सेफ्टी रिपोर्ट कहती है कि मौजूदा AI सिस्टम अभी इंसानों को ओवरटेक करने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि उनकी क्षमताओं में तेजी से सुधार हो रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे जोखिम पैदा हो सकते हैं।
- OpenAI के चीफ साइंटिस्ट पचोकी के मुताबिक, ‘अभी कोई भी AI कंपनी यह दावा नहीं कर सकती कि उसने AI को पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित करने का तरीका खोज लिया है। इसलिए सुरक्षा की सीमाएं तय करने, जरूरत पड़ने पर AI विकास की रफ्तार धीमी करने और देशों के बीच मिलकर नियम बनाने की जरूरत है।’
सवाल-4: AI अगले कुछ सालों में हमारी जिंदगी कैसे बदल सकता है? जवाबः वक्त के साथ AI हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल सकता है। एक्सपर्ट्स 4 बड़े दावे कर रहे हैं…
1-2 साल में इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान हो जाएगा AI
- दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क ने जून 2026 में दावा किया, ‘अगले कुछ साल में AI इंसान से भी ज्यादा बुद्धिमान हो जाएगा। ऐसा कोई काम नहीं होगा जो इंसान कर सकते हैं और AI नहीं कर सकता।’
- एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई, ‘आने वाले कुछ सालों में AI ज्यादातर इंसानों के दिमाग से ज्यादा तेज हो जाएगा।’
- हालांकि मेटा के पूर्व मुख्य AI वैज्ञानिक यान लेकुन का मानना है कि AI इंसान जितना बुद्धिमान नहीं बन सकता। AI ऐसा सिस्टम है, जो भाषा में हेरफेर कर सकता है। इससे हमें लगता है कि वो बुद्धिमान है।
5 साल में एंट्री लेवल की आधी नौकरियां खत्म होने की आशंका
- डारियो अमोदेई का दावा है कि अगले 1 से 5 साल में AI की वजह से एंट्री लेवल की आधी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। अगले 5 सालों में दुनिया में बेरोजगारी दर 20% तक पहुंच जाएगी।
- इलॉन मस्क के मुताबिक, अगले 10-15 सालों में नौकरी करना ऑप्शनल हो जाएगा। AI इतनी प्रोडक्टिविटी पैदा कर देगा कि ज्यादातर जरूरतें रोबोट्स और मशीन पूरी कर देंगी। कुछ लोग नौकरी इसलिए करेंगे क्योंकि उन्हें मजा आता है।
- OpenAI के CEO सैम ऑल्टमेन ने भी 2026 की शुरुआत में AI की वजह से नौकरियों पर खतरे का दावा किया था। हालांकि मई 2026 में उन्होंने कहा, ’AI से नौकरियों के खत्म होने का जैसा डर था, वैसा नहीं हुआ है और वे गलत साबित होने पर खुश हैं।’
- हालांकि एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग ने दावा किया है कि AI के चलते काम करने के नए विकल्प बनेंगे, जिससे नौकरियां बढ़ेगी।
10 साल में सभी बीमारियों का इलाज ढूंढ लेगा AI
- भारत में हुए AI समिट के दौरान डारियो अमोदेई ने दावा किया था, ‘जिन बीमारियों का इलाज सालों से नहीं मिला, AI उसका इलाज ढूंढने में काबिल है।
- गूगल डीपमाइन्ड के CEO और नोबेल प्राइज विजेता डेमिस हसाबिस का कहना है, ‘मुझे उम्मीद है कि अगले 10 सालों में हम AI की मदद से सभी बीमारियों का इलाज ढूंढ लेंगे।’
- AI कैंसर की वैक्सीन बनाने, इंसानों का डिजिटल जुड़वा बनाने, दिल का दौरा आने के महीनों पहले चेतावनी देने और अल्जाइमर का इलाज ढूंढने जैसी तकनीक विकसित कर रहा है।
आखिरकार इंसानों को कंट्रोल कर सकता है AI
- माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने 2023 में लिखा था, ‘AI इंसानों को कंट्रोल कर सकता है। अगर उसे लगा कि इंसान उसके लिए खतरा है, तो वो हमारी बात सुनना बंद कर देगा।’
- भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने भी कहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पूरा विकास मानवता को खत्म कर देगा।
- हालांकि इसके काउंटर में एक्सपर्ट कहते हैं कि AI के पास इंसानी भावनाएं नहीं है, इसलिए उसमें कंट्रोल हासिल करने की कोई इच्छा नहीं होगी।
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