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शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए AICC प्रवक्ता कुलदीप राठौर।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं ठियोग से विधायक कुलदीप राठौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। शिमला में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राठौर ने कहा कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री
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कुलदीप राठौर ने कहा कि पीएम की घोषणाएं सुबह होते-होते बेअसर साबित हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर कथित अत्याचार, पुलिस कार्रवाई, एक छात्रा की मौत और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री मौन रहे। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभा रही है, जबकि भाजपा का आईटी सेल आंदोलन कर रहे छात्रों को देशद्रोही बताने की कोशिश कर रहा है, यह दुर्भग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
जंतर-मंतर में बच्चों से जानवरों जैसा बर्ताव: राठौर
राठौर ने कहा कि जंतर-मंतर में बच्चों के जानवरों जैसा बर्ताव किया गया। कील लगी लाठियां बच्चों पर भांजी गई। एक बेटी का निधन हो गया। मगर पीएम ने दो शब्द तक नहीं बोले। अब बच्चे सड़कों पर उतरे तो ढाई महीने बाद नींट टूटी।
राठौर ने कहा कि मोदी सरकार जवाबदेही से बच रही है। आतंकवादी घटनाओं, पुलवामा हमले, विदेश नीति और आर्थिक नीति सहित कई मामलों में सरकार अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करती। उन्होंने दावा किया कि देश की सीमाएं भी सुरक्षित नहीं हैं और सरकार हर मुद्दे पर लीपापोती कर रही है।
जिन वांगचुक को चीनी एजेंट बताया, उनसे मिलने मंत्री भेजें: राठौर
सोनम वांगचुक का उदाहरण देते हुए राठौर ने कहा कि पहले भाजपा उन्हें चीनी एजेंट बताती थी, लेकिन बाद में केंद्र सरकार के मंत्रियों को उनसे बातचीत के लिए भेजना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों के साथ हुए कथित अत्याचार पर दुख व्यक्त किया है।
PM को संसद में रखनी चाहिए थी ये बाते: कुलदीप
राठौर ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री संसद का सामना करने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अपनी बात रखनी थी तो संसद में रखते। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा राहुल गांधी से सवाल पूछ रहे हैं, जबकि जवाब केंद्र सरकार को देना चाहिए। उनके अनुसार, पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण देश के छात्र मानसिक दबाव में हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।
