राज प्रकाश | बस्ती2 मिनट पहले
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बस्ती में नाबालिग से दुष्कर्म के करीब सात साल पुराने मामले में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। सोमवार को एएसजे/स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए अभियुक्त अनिल कुमार को दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास और 25,500 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में पुलिस की ओर से लगातार की गई प्रभावी पैरवी को फैसले में अहम माना जा रहा है।
मामले की शुरुआत 1 अक्टूबर 2017 को हुई थी। पुलिस के मुताबिक, पीड़िता के पक्ष से थाना लालगंज में शिकायत दी गई थी। शिकायत के आधार पर ग्राम महथा निवासी अनिल कुमार के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की। विवेचक ने घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों, साक्ष्यों और बयानों को जुटाया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
जांच पूरी हुई, लेकिन सात साल तक चली अदालत में सुनवाई
आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मामला न्यायालय पहुंचा। इसके बाद गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी। मामला पॉक्सो कोर्ट में होने के कारण अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा गया। पुलिस अधीक्षक बस्ती के निर्देश पर पैरवी सेल और थाना लालगंज पुलिस ने मामले में लगातार प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों और साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
गवाहों और साक्ष्यों की पैरवी से अभियुक्त दोषी साबित
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों को अदालत के सामने रखा। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त अनिल कुमार को दोषी माना। करीब सात साल तक चली सुनवाई के बाद 17 अगस्त 2026 को एएसजे/स्पेशल पॉक्सो कोर्ट बस्ती ने मामले में अपना फैसला सुनाया।
10 साल की जेल के साथ 25,500 रुपए जुर्माना
अदालत ने दोषी अनिल कुमार को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 25,500 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसले के बाद पुलिस ने इसे प्रभावी अभियोजन पैरवी का परिणाम बताया। पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए विवेचना के साथ-साथ न्यायालय में प्रभावी पैरवी पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।

