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Bihar Development Essential for Viksit Bharat 2047


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6 घंटे पहले

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कुमार रोहित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में अपर केंद्रीय आयुक्त - Dainik Bhaskar

कुमार रोहित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में अपर केंद्रीय आयुक्त

भारत जब वर्ष 2047 तक “विकसित भारत’ का संकल्प लेकर बढ़ रहा है तो यह प्रश्न अनिवार्य हो जाता है कि 13 करोड़ की आबादी वाले बिहार की इसमें क्या भूमिका होगी। भारत की जीडीपी में शीर्ष राज्यों का योगदान सराहनीय हो सकता है, लेकिन जब तक देश का पूर्वी हृदयस्थल अपनी पूर्ण क्षमता से आर्थिक उत्पादन, नवाचार और औ‌द्योगिक पुनर्जागरण का केंद्र नहीं बनेगा, विकसित भारत का सपना परिणति तक नहीं पहुंच सकता। बिहार का आर्थिक यथार्थ निराशा के पुराने विमर्श से बाहर निकल चुका है।

2024-25 में राज्य की जीएसडीपी वृ‌द्धि दर स्थिर मूल्यों पर 8.6% और वर्तमान मूल्यों पर 13.1% दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (2023) के अनुसार राज्य की बहुआयामी गरीबी 51.89% (2015-16) से घटकर 33.76% पर आ गई है, जो गरीबी उन्मूलन की सबसे तेज गति है।

बिहार का पिछड़ापन कोई अपरिहार्य स्थिति नहीं, बल्कि विशिष्ट ऐतिहासिक, नीतिगत और संरचनात्मक आघातों का परिणाम रहा है। मगध और वैशाली ने भारत को प्रथम साम्राज्य, लोकतांत्रिक गणराज्य और चाणक्य का अर्थशास्त्र दिया। नालंदा और विक्रमशिला ज्ञान के वैश्विक केंद्र थे।

किंतु 12वीं-13वीं सदी में इन ज्ञान-केंद्रों पर बर्बर आघात हुए और औपनिवेशिक काल में 1793 के “स्थायी बंदोबस्त’ (जमींदारी व्यवस्था) ने कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज को बंधुआ बना दिया। गिरमिटिया प्रथा के तहत लाखों श्रमिकों का पलायन हुआ।

1952 की “माल भाड़ा समानीकरण नीति’ ने पूर्वी भारत के खनिजों को पूरे देश में समान लागत पर उपलब्ध कराकर बिहार का औ‌द्योगिक लाभ समाप्त कर दिया। अंततः राज्य विभाजन के बाद समस्त खनिज संपदा और भारी उ‌द्योग झारखंड चले गए।

आज राज्य की 50% से अधिक आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है। प्रशासनिक सेवा समेत विविध क्षेत्रों में बिहार की मेधा दमक रही है। इस ब्रेन ड्रेन को “रिवर्स ब्रेन गेन’ में बदलने के लिए स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है। गंगा पर राष्ट्रीय जलमार्ग-1 बिहार को सीधे वैश्विक समुद्री व्यापार से जोड़ता है।

राज्य में प्रस्तावित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क राज्य को दक्षिण-पूर्व एशिया का व्यापारिक प्रवेश द्वार बना सकते हैं। मखाना, शाही लीची, मक्का और केला के लिए मेगा फूड पार्क किसानों की आय बढ़ा सकते हैं। बौद्ध, रामायण, जैन और सिख पर्यटन सर्किट विदेशी मुद्रा अर्जन के बड़े स्रोत बन सकते हैं।

इस रूपांतरण के लिए चरणबद्ध राष्ट्रीय कार्ययोजना आवश्यक है। 2026-2030 के पहले चरण में बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और संस्थागत वित्तपोषण करना होगा। 2031-2040 तक में विनिर्माण, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग, सूचना प्रौ‌द्योगिकी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उद्योगों पर ध्यान देना होगा। 2041-2047 के अंतिम चरण में ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था, नवाचारों के जरिए प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाना होगा। महिला श्रमबल भागीदारी को 45% से ऊपर ले जाना अनिवार्य है।

गंगा पर विस्तृत राष्ट्रीय जलमार्ग-1 बिहार को हल्दिया और कोलकाता बंदरगाहों के माध्यम से सीधे वैश्विक समुद्री व्यापार से जोड़ता है। पटना, भागलपुर और सारण में प्रस्तावित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क राज्य को पूर्वी भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया (आसियान) का व्यापारिक प्रवेश द्वार बना सकते हैं। किसी राज्य का रूपांतरण केवल सरकारी योजनाओं और वित्तीय आवंटन से नहीं हो सकता। इसके लिए योग्यता, नवाचार और उद्यमशीलता को सामाजिक प्रतिष्ठा देनी होगी। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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